बाबा कीनाराम के दरबार में खत्म हुआ विवाद, 70 पंचायत प्रतिनिधियों ने मिलकर कराया अनोखा समझौता
चंदौली जिले में एक ऐसी महापंचायत जुटी, जिसने पिछले चार साल से चल रहे एक कड़वे पारिवारिक विवाद का सुखद अंत कर दिया। करीब 8 घंटे तक मैराथन रूप से चली इस पंचायत में क्षेत्र के लगभग 70 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सम्मानित नागरिक शामिल हुए।
4 साल पुराना पारिवारिक विवाद सुलझा
ग्राम प्रधान रिंकू सिंह की पहल
8 घंटे तक चली महापंचायत
कोर्ट-कचहरी का चक्कर हुआ खत्म
कीनाराम जन्मस्थली पर हुआ समझौता
सभी के सामूहिक प्रयास, सूझबूझ और धैर्य की वजह से एक पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और मनमुटाव हमेशा के लिए खत्म हो गया। पंचायत के पंचों ने दोनों परिवारों को समझा-बुझाकर उनके बीच दोबारा सुलह करा दी, जिसके बाद टूटने की कगार पर खड़ा यह रिश्ता एक बार फिर से जुड़ गया।
थाना और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया था मामला
पूरा मामला यह है कि सराय रसूलपुर गांव की रहने वाली शिवांगी देवी की शादी लगभग चार साल पहले राया गांव के निवासी गौतम यादव से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ गया और पारिवारिक कलह इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मामला बलुआ थाना, कोर्ट और कचहरी की दहलीज तक पहुंच गया। पिछले चार साल से दोनों पक्ष कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
हालात इस कदर खराब हो चुके थे कि दोनों का रिश्ता लगभग पूरी तरह टूटने की स्थिति में आ गया था। रिश्तेदारों और करीबियों ने भी उम्मीद छोड़ दी थी क्योंकि कानूनी दांव-पेंच के बीच समझौते की दूर-दूर तक कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही थी। लेकिन समाज के बड़ों ने दोनों की जिंदगी को बर्बाद होने से बचाने का फैसला किया।
रिंकू सिंह और बलुआ पुलिस की पहल लाई रंग
गुरुवार को बाबा कीनाराम जी के तपोस्थली के सभागार में दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर बड़ी पंचायत बुलाई गई। ग्राम प्रधान एवं प्रशासक आशुतोष कुमार सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने इस कठिन समझौते को मुमकिन बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि जब हर कोई इस रिश्ते से पूरी तरह निराश हो चुका था, तब भी पंचायत के पंचों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और लगातार 8 घंटे तक दोनों पक्षों की बातें सुनीं।
इस सफल समझौते में बलुआ थाना प्रभारी अरुण कुमार सिंह का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने इस विवाद को कानूनी दांव-पेंच में उलझाने के बजाय सामाजिक पंचायत के माध्यम से सुलझाने की पहल की, जिससे दोनों परिवारों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत का रास्ता साफ हो सका। अंततः बाबा कीनाराम जी की कृपा से दोनों परिवार फिर से एक होने को तैयार हो गए।
स्टांप पेपर पर दी लिखित सहमति, सम्मान के साथ हुई विदाई
सुलह की बातचीत पक्की होने के बाद दोनों पक्षों ने भविष्य में साथ रहने के लिए स्टांप पेपर पर अपनी लिखित सहमति दी। इसके बाद पूरे पंचायत की मौजूदगी में पति-पत्नी ने बाबा कीनाराम जी के दरबार में सिर झुकाकर सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद लिया। इसके बाद पंचों की उपस्थिति में बहू की सम्मानपूर्वक विदाई की गई।
इस ऐतिहासिक पंचायत के दौरान ग्राम प्रधान रमाकांत यादव, नारद यादव, पूर्व प्रधान सूबेदार सिंह, सुरेंद्र मौर्य, मंगल यादव, महादेव, राम मुराहू यादव, श्रवण कुशवाहा, छगुर यादव, राजेंद्र यादव, मनोज सिंह, रमेश सिंह, रवि यादव, लोरी यादव, श्रीरि सिंह, सुमित्रा देवी, वीरेंद्र यादव, रविशंकर, सीताराम, अशोक यादव और बनारसी यादव समेत सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे। इलाके में यह पंचायत मिसाल बन चुकी है और लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।