अब स्कूल में बच्चों को मुर्गा बनाया या पीटा तो होगी जेल, BSA का बड़ा फरमान जारी
चंदौली के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के लिए सख्त आदेश जारी किया है। बच्चों को पीटने, मुर्गा बनाने या मानसिक रूप से प्रताड़ित करने पर सीधे FIR होगी और प्रधानाचार्य भी जेल जाएंगे।
बच्चों को मुर्गा बनाने और पीटने पर होगी FIR
दोषी शिक्षक के साथ प्रधानाचार्य भी जाएंगे जेल
हर स्कूल में अनिवार्य रूप से लगेगी शिकायत पेटिका
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और 112 पर होगी शिकायत
बीईओ (BEO) करेंगे स्कूलों का औचक निरीक्षण
चंदौली जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार ने जनपद के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के लिए एक बेहद सख्त आदेश जारी किया है। इस नए आदेश के बाद अब स्कूलों में बच्चों पर हाथ उठाने वाले शिक्षकों की खैर नहीं होगी। बीएसए का साफ कहना है कि अगर किसी भी स्कूल में शिक्षक ने बच्चे को मारा-पीटा, डंडे से पीटा, धूप में खड़ा किया, मुर्गा बनाया या गाली-गलौज की, तो सीधे थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। इस मामले में सिर्फ टीचर ही नहीं, बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य को भी जेल जाना पड़ेगा।
RTE एक्ट का हवाला, जिम्मेदारी तय
बीएसए ने 27 जुलाई को जारी अपने लिखित आदेश में स्पष्ट किया कि राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009 की धारा 17 के तहत बच्चों को किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक यातना देना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इस आदेश में जिम्मेदारी पूरी तरह फिक्स कर दी गई है। अगर किसी स्कूल में ऐसी घटना होती है तो प्रधानाचार्य को भी बराबर का दोषी मानते हुए तुरंत निलंबित किया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी केस दर्ज होगा। वहीं, प्राइवेट स्कूलों में दोषी शिक्षक के साथ-साथ प्रबंधक (मैनेजर) पर भी गाज गिरेगी और स्कूल की मान्यता तक रद्द हो सकती है।
घटना छिपाने वालों पर भी होगी सख्त कार्रवाई
अक्सर देखा जाता है कि ऐसी घटनाओं को स्कूल प्रशासन दबाने की कोशिश करता है। लेकिन नए नियम के तहत अगर किसी स्कूल ने ऐसी किसी घटना को छिपाने की कोशिश की, तो इसे गंभीर कदाचार (लापरवाही) माना जाएगा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बीएसए सचिन कुमार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि बच्चों के उत्पीड़न से जुड़ी सूचना को दबाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
शिकायत के लिए बच्चों के पास होंगे 4 रास्ते
बच्चों को प्रताड़ना से बचाने के लिए प्रशासन ने 4 विकल्प दिए हैं। अब पीड़ित बच्चा या उसके अभिभावक सीधे बीईओ (BEO) या बीएसए कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी कॉल किया जा सकता है। हर स्कूल में एक शिकायत पेटी (ड्रॉप बॉक्स) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रार्थना सभा (अ셈ब्ली) के दौरान बच्चों को इन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देना जरूरी होगा और शिकायत करने वाले बच्चे का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
खंड शिक्षा अधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण
इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए बीएसए ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों का अचानक दौरा यानी औचक निरीक्षण करें। अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी स्कूल में बच्चों को शारीरिक या मानसिक रूप से परेशान न किया जा रहा हो। बीएसए के इस कड़े कदम से जहां एक तरफ मनमानी करने वाले शिक्षकों में हड़कंप है, वहीं अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।