खरीफ फसलों पर कीट और रोगों का खतरा: कृषि विभाग ने जारी की विशेष एडवाइजरी, ऐसे बचाएं अपनी फसल

खरीफ सीजन में फसलों को हानिकारक कीटों और रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने फसलवार वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि अधिकारी की इन खास टिप्स को अपनाकर किसान अपनी लागत कम कर सकते हैं और पैदावार बढ़ा सकते हैं।
 

खरीफ फसलों की वैज्ञानिक निगरानी

धान में खरपतवार का नियंत्रण

तना बेधक कीट से बचाव

फसलों के लिए बीज शोधन

राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली ऐप

 जिले सहित विभिन्न क्षेत्रों में खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई और धान की रोपाई का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच बदलते मौसम को देखते हुए कृषि निदेशालय लखनऊ के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसलवार एडवाइजरी जारी की है। कृषि विभाग का कहना है कि अगर किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें और वैज्ञानिक सुझावों को अमल में लाएं, तो कीट और रोगों पर होने वाले खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस समय खेतों में धान, मक्का, अरहर, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग और विभिन्न सब्जियों की खेती की जा रही है, जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है।

धान की फसल में खरपतवार और विभिन्न कीटों से ऐसे करें बचाव
धान की फसल को शुरुआती दौर में खरपतवारों से बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए रोपाई के दो से तीन दिनों के भीतर पेनोक्ससुलम 21.7% एस.सी. की 100 मिली मात्रा या बिसपयारीबैक सोडियम 10% एस.सी. की 200 मिली मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यदि धान की सीधी बुवाई की गई है, तो बेनसलफ्यूरान 60% डी.एफ. या ऑक्सिफ्लोरफेन 23.5% ई.सी. का उचित घोल बनाकर इस्तेमाल करें। तना बेधक और पत्ती लपेटक कीटों की निगरानी के लिए खेतों में प्रति एकड़ 4-5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। गंभीर प्रकोप होने पर बाईफेनथ्रिन 10% ई.सी. या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. का छिड़काव करें। इसके अलावा, धान में दुग्धावस्था के दौरान लगने वाले फुदका कीट के नियंत्रण के लिए बुप्रोफेजिन या बेंजीपायरीमोक्सान का उपयोग करें। जीवाणु झुलसा रोग से बचाव के लिए स्ट्रेप्टोमाईसिन सल्फेट और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का मिश्रण प्रभावी साबित होता है।

मक्का और दलहनी फसलों का वैज्ञानिक प्रबंधन
मक्का की फसल में तना बेधक कीट का प्रभाव दिखने पर डाईमिथोएट 30% ई.सी. का छिड़काव करें। फॉल आर्मी वॉर्म जैसे खतरनाक कीट से सुरक्षा के लिए खेतों में 20-25 पक्षी आश्रय (टी-पर्च) और प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप) लगाना फायदेमंद रहता है। वहीं अरहर, उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों को मिट्टी से पैदा होने वाले रोगों से बचाने के लिए ट्राईकोडर्मा और ब्युवेरिया बेसिअना को गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई के समय खेत में डालना चाहिए। बीज जनित रोगों से सुरक्षा के लिए बुवाई से पहले कार्बोक्सिन और थिरम से बीज शोधन अवश्य करें।

सब्जी वर्गीय फसलें और आधुनिक एआई तकनीक का लाभ
सब्जियों में खासकर बैंगन को फल और तना बेधक कीट से बचाने के लिए ब्रोफ्लोनिलाइड 20% एस.सी. या कार्बोसल्फान का उपयोग करें, जबकि मिर्च में थ्रिप्स की समस्या के लिए सायंट्रानिलीप्रोल 10.26% ओ.डी. का छिड़काव करें। आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक 'राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली ऐप' विकसित किया है। यह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित मोबाइल ऐप किसानों को स्वयं ही कीट व रोगों की पहचान करने और उनके सटीक निवारण की जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।