केवल बिजली की खपत ही नहीं, संविदा कर्मियों के शोषण से जुड़ी है बिजली कटौती की समस्या, जान जोखिम में डाल रहे बिजली संविदा कर्मचारी

 

भीषण गर्मी में मात्र 8,000 रुपये की दिहाड़ी पर 24 घंटे जान जोखिम में डालने वाले बिजली संविदा कर्मियों के बदतर हालात पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने आवाज उठाई है। पूरी रिपोर्ट में जानिए इनके अमानवीय शोषण का सच।

 
 

महज आठ हजार रुपये महीने पर संविदा कर्मियों से 24 घंटे काम

संविदा बिजली कर्मचारियों के लिए कोई साप्ताहिक अवकाश या सामाजिक सुरक्षा नहीं

नौकरी से निकाले जाने के डर से रात में भी फ्यूज ठीक करने की मजबूरी

एआईपीएफ ने की समान कार्य के लिए समान वेतन और बीमा की मांग

चंदौली/उत्तर प्रदेश: सूबे के तमाम जिलों में बिजली की जमीनी वितरण व्यवस्था पूरी तरह से संविदा कर्मचारियों और ठेकेदारी प्रथा के भरोसे चल रही है। हाड़ कंपाने वाली ठंड हो या रिकॉर्ड तोड़ती भयानक गर्मी, ये कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं। महज आठ हजार रुपये के मासिक मानदेय पर काम करने वाले इन संविदा कर्मियों से 24 घंटे ड्यूटी ली जाती है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने इन संविदा बिजली कर्मचारियों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इन्हें स्थायी करने या समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई है।

बिना छुट्टी और सामाजिक सुरक्षा के 'दिहाड़ी मजदूर' जैसी जिंदगी
विभाग में ग्राउंड लेवल पर तैनात इन संविदा कर्मचारियों के लिए न तो कोई रविवार होता है और न ही कोई तय समय। इनका कार्यक्षेत्र काफी बड़ा होता है, जहां इन्हें दिन-रात सक्रिय रहना पड़ता है। यदि रात में कहीं फ्यूज उड़ जाए और कंट्रोल रूम को सूचना मिले, तो इन्हें तुरंत मौके पर जाना पड़ता है। इन कर्मचारियों में इस बात का डर हमेशा बना रहता है कि यदि उन्होंने समय पर फाल्ट ठीक नहीं किया, तो अगले ही दिन उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। बिना किसी सामाजिक सुरक्षा, जीपीएफ या फंड के इनका जीवन बिल्कुल एक दिहाड़ी मजदूर जैसा होकर रह गया है।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव और समय पर वेतन न मिलने की मार
विभागीय विडंबना यह है कि जहां परमानेंट लाइनमैन को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा मिलती है, वहीं संविदा कर्मियों का भयानक शोषण किया जाता है। इनकी पूरी कार्यप्रणाली पूरी तरह से जेई (JE) या एसडीओ (SDO) की मर्जी पर निर्भर करती है। इसके बावजूद विभाग इन्हें समय पर वेतन तक उपलब्ध नहीं कराता है। एआईपीएफ ने पुरजोर तरीके से मांग की है कि ठेकेदारी प्रथा के तहत काम कर रहे इन बिजली कर्मचारियों को तत्काल तमाम जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और उनका पर्याप्त बीमा कराया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय हादसे के वक्त उनके परिवार को सहारा मिल सके।