Google-AI डॉक्टर से लोग ले रहे हैं दवाई! असली डॉक्टरों ने दी है ऐसी चेतावनी
चन्दौली में इंटरनेट और AI से इलाज ढूंढने का ट्रेंड लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। घरेलू नुस्खों और गूगल की सलाह पर दवा खाकर लोग गंभीर संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों ने 48 घंटे से ज्यादा बुखार होने पर तुरंत जांच की सलाह दी है।
इंटरनेट और AI से उपचार लेना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
48 घंटे से अधिक बुखार होने पर डॉक्टर से मिलें
घरेलू नुस्खे इलाज नहीं, सिर्फ बचाव का माध्यम
बिना डॉक्टरी सलाह एंटीबायोटिक लेने से गंभीर संक्रमण
मेडिकल स्टोर से सीधे दवा खरीदना पड़ सकता है भारी
बदलते मौसम और बढ़ती ठंड के साथ वायरल बुखार, डेंगू और टाइफाइड का प्रकोप बढ़ गया है। लेकिन इस बीच एक खतरनाक प्रवृत्ति सामने आई है—'सेल्फ मेडिकेशन'। चंदौली जनपद में बड़ी संख्या में लोग बीमार होने पर चिकित्सक के पास जाने के बजाय गूगल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उपचार की सलाह ले रहे हैं। घरेलू नुस्खों और बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई दवाओं के कारण मरीजों की स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ रही है।
इंटरनेट जानकारी का माध्यम है, डॉक्टर का विकल्प नहीं
बरहनी पीएचसी की चिकित्सक डॉ. कुसुम ने बताया कि अस्पताल में आने वाले हर 10 में से 3 मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने पहले खुद से गूगल या एआई पर दवाएं सर्च कीं और उनका सेवन किया। डॉ. कुसुम के अनुसार, "कई मरीजों में गंभीर संक्रमण (Infection) देखने को मिल रहा है क्योंकि उन्होंने गलत एंटीबायोटिक का चुनाव किया। हर शरीर और बीमारी के लक्षण अलग होते हैं, जिसे केवल एक विशेषज्ञ ही समझ सकता है।"
48 घंटे से अधिक बुखार तो हो जाएं सावधान
प्रभारी चिकित्साधिकारी बरहनी डॉ. राजेश कुमार सिंह ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि अस्पताल आने वाले हर 50 में से लगभग 10-12 मरीज गलत उपचार की वजह से अपनी हालत बिगाड़ कर आते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे से अधिक समय तक बुखार रहता है, तो बिना देरी किए रक्त की जांच करानी चाहिए। हल्दी, गुड़, लौंग और अदरक जैसे नुस्खे केवल प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, इन्हें संपूर्ण वैज्ञानिक उपचार मान लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
भ्रामक जानकारी और मेडिकल स्टोर से सीधी खरीद
क्षेत्र के खोर गांव के खुरसानी राम और भदखरी गांव के प्रवीन सिंह जैसे कई मरीज उदाहरण हैं, जिन्होंने गूगल पर लक्षण देखकर सीधे मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदीं। तीन-चार दिनों तक सुधार न होने और स्थिति गंभीर होने पर वे पीएचसी बरहनी पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि वायरल और फ्लू के लक्षण एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनकी दवाएं अलग होती हैं। गलत दवा लेने से न केवल प्लेटलेट्स गिर सकते हैं, बल्कि किडनी और लिवर पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह: क्या करें और क्या न करें?
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि तेज बुखार, उल्टी, बदन दर्द या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत सरकारी अस्पताल जाएं। बिना डॉक्टरी पर्चे के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक मांगना बंद करें। याद रखें, एआई और गूगल केवल सामान्य जानकारी दे सकते हैं, वे आपकी शारीरिक स्थिति का परीक्षण नहीं कर सकते।