दिल की बीमारियों से जुड़ी बड़ी जानकारी: क्या अंतर है हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में? ऐसे बचाएं मरीज की जान
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अंतर
दिल की धड़कन रुकने के लक्षण
इमरजेंसी में सीपीआर देने का तरीका
सीने में दर्द और सांस फूलना
हृदय स्वास्थ्य और प्राथमिक चिकित्सा उपाय
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट शब्दों का इस्तेमाल एक ही बीमारी के लिए कर लेते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस में ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। हालांकि, ये दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं और इनमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। कभी-कभी हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न देना भारी पड़ सकता है, खासकर तब जब लक्षण धीरे-धीरे शुरू हों। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और आपात स्थिति में कैसे जान बचाई जा सकती है।
कार्डियक अरेस्ट क्या है और क्यों होता है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। ऐसा आमतौर पर किसी इलेक्ट्रिकल समस्या के कारण होता है, जिससे दिल की धड़कन अचानक अनियंत्रित हो जाती है। जब दिल पंप करना बंद कर देता है, तो दिमाग, फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है। कार्डियक अरेस्ट होने पर व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है, कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और उसकी सांस रुक जाती है।
आपात स्थिति में कैसे बचाएं जान?
अगर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होता है, तो तुरंत सीपीआर (CPR) देने से उसकी जान बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है। सबसे पहले लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करके एम्बुलेंस बुलाएं और तुरंत मरीज को चेस्ट कंप्रेशन यानी सीपीआर देना शुरू करें।
यदि आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) मौजूद हो, तो उसका इस्तेमाल करें। अगर दो लोग मदद कर रहे हों, तो एक व्यक्ति सीपीआर दे और दूसरा इमरजेंसी नंबर पर फोन करके एईडी का इंतजाम करे। बिना मदद के हर बीतते मिनट के साथ बचने की उम्मीद 10 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
हार्ट अटैक क्या है और इसके क्या लक्षण हैं?
हार्ट अटैक की स्थिति में दिल के किसी हिस्से तक खून नहीं पहुंच पाता, क्योंकि खून की सप्लाई करने वाली मुख्य नस में रुकावट आ जाती है। यदि खून के बहाव की इस समस्या को समय रहते ठीक न किया जाए, तो दिल की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। हार्ट अटैक के दौरान आमतौर पर दिल धड़कता रहता है। इसके लक्षणों में सीने में तेज दर्द, शरीर के ऊपरी हिस्से जैसे कंधों, गर्दन या हाथ में बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना आना, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होना शामिल है।
महिलाओं और बुजुर्गों में अलग हो सकते हैं संकेत
हार्ट अटैक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों और बुजुर्गों में इसके लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। कई बार इनमें सीने में तेज दर्द जैसा मुख्य लक्षण नहीं दिखता, बल्कि सिर्फ घबराहट या थकावट महसूस हो सकती है। लक्षण आते-जाते रहें या धीरे-धीरे शुरू हों, तब भी लापरवाही न बरतें। अगर जरा सा भी शक हो, तो तुरंत एम्बुलेंस या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। इमरजेंसी कर्मचारी मौके पर पहुंचते ही इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे अस्पताल पहुंचने तक कीमती समय बच जाता है।