क्या Investment है 100 साल जिंदा रखने वाली कैप्सूल? डॉ. विनय प्रकाश तिवारी से समझिए लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग का अनोखा कनेक्शन

 

क्या निवेश इंसान को 100 साल तक जिंदा रख सकता है? डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के इस दिलचस्प लेख में जानिए वारेन बफेट और चार्ली मंगर जैसे दिग्गजों की लंबी उम्र, कम्पाउडिंग का जादू और 100 साल वाली 'फाइनेंशियल कैप्सूल' का रहस्य।

 
 

क्या निवेश है 100 साल की दवा

कम्पाउडिंग और लंबी उम्र का कनेक्शन

वारेन बफेट और चार्ली मंगर की कहानी

डॉ विनय प्रकाश तिवारी का विशेष लेख

पिछले कुछ दिनों से मैं दुनिया के ऐसे महान लोगों की कहानियां पढ़ रहा था, जिन्होंने निवेश और कम्पाउडिंग (Compounding) के जरिए असाधारण संपत्ति बनाई। मैं देख रहा था कि उन्होंने कितने पैसे से शुरुआत की, कितने वर्षों तक बाजार में टिके रहे और उनका पैसा कितने गुना बढ़ा। लेकिन अचानक मेरा ध्यान एक ऐसी चीज पर गया जो शायद इन भारी-भरकम आंकड़ों से भी ज्यादा दिलचस्प थी—इन सफल निवेशकों की उम्र!

दिग्गज निवेशकों की उम्र देखकर चौंक जाएंगे आप

मैंने जब दोबारा उनके नाम और उम्र पर नजर डाली, तो आंकड़े वाकई हैरान करने वाले थे:---

एन शाइबर (Anne Scheiber): 101 वर्ष

हावर्ड मार्कस (Howard Marcus): 104 वर्ष

लॉटी मार्कस (Lottie Marcus): 99 वर्ष

चार्ली मंगर (Charlie Munger): 99 वर्ष

वारेन बफेट (Warren Buffett): 95 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं।

इन आंकड़ों को देखकर मेरे मन में एक मजेदार सवाल आया—कहीं Investment ही तो 100 साल जिंदा रखने वाली कोई Capsule नहीं है? हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और निवेश करने से कोई 100 साल जी जाएगा, ऐसा दावा करना गलत होगा। लेकिन यह संयोग बेहद दिलचस्प जरूर है।

एन शाइबर: 5,000 डॉलर से 22 मिलियन डॉलर तक का सफर
अमेरिका की आईआरएस (IRS) ऑडिटर रहीं एन शाइबर की आमदनी कोई असाधारण नहीं थी। रिटायरमेंट के समय उनके पास केवल $5,000 की बचत थी। उन्होंने इस पैसे को सही जगह लगाया, मिलने वाले लाभांश (Dividends) को दोबारा निवेश किया और अपने पोर्टफोलियो को दशकों तक बढ़ने दिया। जब 1995 में 101 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ, तब उनकी संपत्ति करीब $22 million (लगभग 2.2 करोड़ डॉलर) हो चुकी थी। उन्होंने सिर्फ पैसा इन्वेस्ट नहीं किया, बल्कि अपने पैसे को वक्त दिया।

हावर्ड-लॉटी मार्कस और धैर्य की प्रतिमूर्ति चार्ली मंगर
हावर्ड और लॉटी मार्कस ने वारेन बफेट के शुरुआती दौर में निवेश किया और दशकों तक बाजार में बने रहे। हावर्ड 104 साल और लॉटी 99 साल जिए। उन्होंने कम्पाउडिंग को अपनी आंखों से होते देखा। वहीं, दुनिया को धैर्य सिखाने वाले चार्ली मंगर का निधन 99 वर्ष की उम्र में हुआ। मंगर का मानना था कि हर समय कुछ न कुछ करते रहना जरूरी नहीं है, कई बार सही निवेश के साथ शांति से बैठे रहने की क्षमता ही सबसे बड़ी कला होती है।

वारेन बफेट और धन का असली सूत्र: Return × Time
वारेन बफेट ने अपना पहला स्टॉक महज 11 साल की उम्र में खरीदा था और आज वे 95 वर्ष से अधिक के हो चुके हैं। सोचिए, किसी व्यक्ति को अपने पैसे को compound होते देखने के लिए आठ दशकों से भी ज्यादा का समय मिले, तो परिणाम कितना विशाल होगा! बफेट की संपत्ति का राज केवल उच्च रिटर्न नहीं, बल्कि 'रिफंड × टाइम' का वो समीकरण है जो लंबे समय तक चलता रहा।

अगर हम 100 साल जी गए, तो तैयारी कैसी हो?
लॉन्ग-टर्म निवेशक हमेशा भविष्य की सोचता है। वह अगले सोमवार की नहीं, बल्कि अगले 10, 20 या 30 साल की प्लानिंग करता है। हम अमूमन 60 साल की उम्र तक के रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, लेकिन अगर हमारी जिंदगी 90, 95 या 104 साल की हो गई तो? तब सिर्फ लंबा जीना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उस जीवन को सम्मान और आर्थिक आजादी के साथ जीने के लिए हमारे पैसे का भी हमारे साथ जिंदा रहना जरूरी होगा।

इसलिए, निवेश को मैं 100 साल जिंदा रखने वाली दवा तो नहीं कह सकता, लेकिन इसे 100 साल वाली 'फाइनेंशियल कैप्सूल' जरूर कह सकता हूं। यह जिंदगी लंबी करे न करे, लेकिन अगर जिंदगी लंबी हो गई, तो उसे आर्थिक रूप से आसान जरूर बना देती है। इसलिए निवेश करते रहिए... क्या पता 100 साल जीना पड़ जाए!

- डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
संस्थापक - LTP Calculator- सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार

 डिस्क्लेमर: निवेश और दीर्घायु के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह लेख केवल लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग और कम्पाउडिंग को समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेश जोखिमों के अधीन हैं।