Kartika Health Tips: आयुर्वेद के अनुसार कार्तिक मास में क्या खाएं और किससे करें परहेज? जानिए सेहत का राज

 

कार्तिक मास धर्म और सेहत दोनों के लिहाज से बेहद खास है। जानिए इस पावन महीने में दीपदान का महत्व, त्योहारों की धूम और आयुर्वेद के अनुसार खानपान के जरूरी नियम।

 
 

धर्म और सेहत का कार्तिक कनेक्शन

कार्तिक मास में दीपदान का महत्व

तुलसी सेवन और आयुर्वेद के नियम

क्या खाएं और क्या न खाएं

कार्तिक मास के प्रमुख व्रत त्योहार

कार्तिक मास का पावन महीना शुरू हो चुका है, जो धर्म और सेहत दोनों ही दृष्टिकोण से हर व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में कार्तिक मास को त्योहारों और व्रतों का महीना कहा जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ से पीढ़ियों तक के पाप मिट जाते हैं। इसी पावन महीने में भगवान धन्वंतरि भी प्रकट हुए थे, जिसके कारण आयुर्वेद में भी इस माह की विशेष महिमा और दिनचर्या का विस्तार से वर्णन किया गया है।

करवा चौथ से लेकर देव दिवाली तक त्योहारों की धूम
कार्तिक का महीना आते ही देश भर में धार्मिक उल्लास छा जाता है। इस महीने में एक से बढ़कर एक बड़े और पावन त्योहार आते हैं। इसमें करवा चौथ, अहोई व्रत, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गोपाष्टमी, अक्षय नवमी, देवशयनी एकादशी, तुलसी विवाह और देव दिवाली जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं। इन त्योहारों की वजह से पूरे महीने बाजारों में रौनक और घरों में पूजा-पाठ का माहौल बना रहता है।

गंगा स्नान और दीपदान का मिलता है विशेष पुण्य
कार्तिक मास में पवित्र नदियों, खासकर गंगा स्नान करने का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। यदि आप गंगा घाट तक न जा सकें, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद अनाज, फल, कपड़े और जरूरत की चीजों का दान करना शुभ रहता है। इस महीने दीपदान का भी विशेष महत्व है। दीपदान करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में सुख-समृद्धि देती हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है, पापों से मुक्ति मिलती है और राहु-केतु तथा यम के नकारात्मक प्रभाव व ग्रह दोष शांत होते हैं।

बदलते मौसम में सेहत का रखें खास ख्याल
कार्तिक मास को ऋतु परिवर्तन या संक्रमण का महीना भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय मौसम तेजी से बदलता है। इस दौरान बुखार, एलर्जी, जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके अलावा, दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में प्रदूषण बढ़ने लगता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए इस महीने अपनी शारीरिक सेहत पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है।

आयुर्वेद के नियम: क्या खाएं और किससे करें परहेज
आयुर्वेद के अनुसार, इस महीने खाली पेट तुलसी की पत्तियों का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। तुलसी शरीर को कई तरह के संक्रमणों से बचाती है। सुबह उठकर हल्के गर्म पानी से स्नान करना चाहिए। कार्तिक मास में बैंगन, दही और उससे बनी चीजें, करेला, फलियां और दालों का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके बजाय जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियां जैसे मूली, गाजर, शकरकंद और जिमीकंद का सेवन ज्यादा करना चाहिए, क्योंकि इन पर संक्रमण की संभावना कम होती है और ये शरीर को स्वस्थ रखती हैं।