सोशल मीडिया का खौफनाक सच: ब्यूटी रील्स देख क्या कर रहे युवा, जिससे बढ़ रहा है हार्मोन बिगड़ने का खतरा

 

अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर ब्यूटी और स्किनकेयर कंटेंट देखने वाले छात्र ज्यादा पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें मौजूद केमिकल्स से किशोरों के हार्मोन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

 
 

सोशल मीडिया से किशोरों में बढ़ा प्रोडक्ट इस्तेमाल

स्किनकेयर प्रोडक्ट्स से हार्मोन बिगड़ने का खतरा

अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी की रिसर्च

इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो करने पर 30% अधिक इस्तेमाल

लेबल पढ़े बिना ब्यूटी प्रोडक्ट्स चुन रहे छात्र

आज के समय में सोशल मीडिया सिर्फ टाइमपास या दोस्तों से बात करने का जरिया नहीं रह गया है। यह हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों के लिए। हाल ही में अमेरिका में हुई एक नई रिसर्च में सोशल मीडिया को लेकर बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू सामने आया है।

अमेरिका की मशहूर रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है, जिसे 'जर्नल ऑफ एक्सपोजर साइंस एंड एनवायर्नमेंटल एपिडेमियोलॉजी' में छापा गया है। इस रिसर्च में न्यू जर्सी के प्रिंसटन हाई स्कूल के 143 छात्रों को शामिल किया गया था। उनसे पूछा गया कि उन्होंने 24 घंटे के भीतर कितने साबुन, शैंपू, परफ्यूम, डियोड्रेंट, सनस्क्रीन और मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया।

इन्फ्लुएंसर्स को देखकर 40% बढ़ा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल

शोध में सामने आया कि जो छात्र सोशल मीडिया पर ब्यूटी, हेयर केयर या स्किनकेयर ट्यूटोरियल ज्यादा देखते थे, वे बाकी बच्चों की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे थे। वहीं, जिन छात्रों ने अपनी प्रोडक्ट लाइन चलाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो किया था, उन्होंने 30 फीसदी अधिक प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए।

रिसर्च की मुख्य लेखिका एमिली बैरेट के अनुसार, हम अक्सर सोशल मीडिया के मानसिक तनाव और पढ़ाई पर पड़ने वाले असर की बात करते हैं। लेकिन यह अध्ययन दिखाता है कि सोशल मीडिया बच्चों को ऐसे पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए उकसा रहा है, जिनमें मौजूद केमिकल शरीर के हार्मोन सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं।

लड़कियां कर रहीं दोगुना इस्तेमाल, लेबल पढ़ने की आदत नहीं

स्टडी में यह भी पाया गया कि लड़कों की तुलना में लड़कियां प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। लड़कियों ने एक दिन में औसतन 14 पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए, जो लड़कों के मुकाबले लगभग दोगुना था। वहीं, करीब 57 फीसदी छात्रों ने बताया कि वे परफ्यूम या बॉडी स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं।

सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि छात्र इन प्रोडक्ट्स को बिना सोचे-समझे और बिना जांचे लगा रहे हैं। सिर्फ 19 फीसदी बच्चे ही प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसके पीछे लिखा लेबल पढ़ते हैं। वहीं, सुरक्षित प्रोडक्ट की पहचान कराने वाले ऐप्स का इस्तेमाल सिर्फ 5 फीसदी छात्र ही करते हैं।

केमिकल से हार्मोन बिगड़ने का डर

बाजार में मिलने वाले कई साबुन, शैंपू, डियोड्रेंट और मेकअप में फ्थैलेट्स, पैराबेन्स और फेनॉल्स जैसे केमिकल पाए जाते हैं। ये रसायन शरीर के प्राकृतिक हार्मोन सिग्नल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। किशोरावस्था वैसे भी शरीर के विकास का समय होता है, ऐसे में इन केमिकल्स के संपर्क में आने से बच्चों के स्वास्थ्य पर लंबे समय में बुरा असर पड़ सकता है।

शोधकर्ता अब आगे यह पता लगाने में जुटे हैं कि कौन से सोशल मीडिया अकाउंट्स बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उम्र में बच्चों को सुरक्षित प्रोडक्ट्स चुनने और रसायनों से बचने की जानकारी देना बहुत जरूरी हो गया है।