बेसमेंट में चल रहे 2 दर्जन अवैध अस्पतालों पर गिरेगी गाज, DM के आदेश पर एक्शन वाली टीम तैयार
चंदौली जिले में बेसमेंट में अवैध रूप से चल रहे दो दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन मिलकर बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। लापरवाही मिलने पर लाइसेंस रद्द होगा।
बेसमेंट के अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने बनाई संयुक्त टीम
दो दर्जन से ज्यादा अस्पताल चिन्हित
सुरक्षा मानकों की होगी सख्त जांच
ढिलाई बरतने पर होगी सीधी सीलिंग
चंदौली जिले में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। जिले में नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में धड़ल्ले से चल रहे प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ अब आर-पार की जंग शुरू होने वाली है। सूबे की सरकार से मिले कड़े दिशा-निर्देशों के बाद जिलाधिकारी (DM) चंद्र मोहन गर्ग के आदेश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. पारितोष मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम का गठन कर दिया है।
यह स्पेशल टीम अब पूरे जिले में घूम-खूमकर ऐसे अस्पतालों की कुंडली खंगालेगी जो कानून और नियमों के खिलाफ जाकर अंडरग्राउंड यानी बेसमेंट में मरीजों को भर्ती कर रहे हैं या ओपीडी चला रहे हैं। शासन की तरफ से साफ कहा गया है कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर चलने वाले अस्पतालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दो दर्जन से ज्यादा अस्पताल रडार पर, भेजा जाएगा नोटिस
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से चलाए गए शुरुआती सर्वे में चंदौली मुख्यालय समेत पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (डीडीयू नगर), धानापुर, चहनिया, बरहनी, सैयदराजा और नौगढ़ जैसे बड़े इलाकों में चलने वाले कई अस्पताल रडार पर आ गए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जिले भर के करीब दो दर्जन से अधिक (24 से ज्यादा) निजी अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया गया है।
प्रशासन इन सभी चिन्हित अस्पतालों को सबसे पहले एक आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी करने जा रहा है। नोटिस मिलने के बाद अगर तय समय सीमा के भीतर अस्पताल संचालकों ने नियमों का पालन नहीं किया या अपने अस्पताल को बेसमेंट से बाहर शिफ्ट नहीं किया, तो उनके खिलाफ अस्पताल को सील करने और लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ बेसमेंट ही नहीं, फायर सेफ्टी और लाइसेंस की भी होगी जांच
इस पूरे महाअभियान को लेकर डिप्टी सीएमओ और निजी अस्पताल प्रभारी डॉ. संजय सिंह ने बताया कि सरकारी नियमों के मुताबिक बेसमेंट में अस्पताल का संचालन मरीजों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। आपातकालीन स्थिति में बेसमेंट से मरीजों को बाहर निकालना बेहद कठिन होता है। उन्होंने साफ किया कि इस अभियान के दौरान टीम सिर्फ बेसमेंट ही नहीं देखेगी, बल्कि अस्पतालों में आग से निपटने के इंतजाम (फायर सेफ्टी), आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), बिल्डिंग का फिटनेस सर्टिफिकेट और स्वास्थ्य विभाग का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी चेक करेगी।
डिप्टी सीएमओ ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों से हाथ जोड़कर अपील भी की है कि अगर किसी का भी अस्पताल बेसमेंट में चल रहा है, तो वह किसी बड़ी कार्रवाई का इंतजार न करें। वे तुरंत अपने सेटअप को वहां से हटाकर सरकार के तय मानकों के अनुसार सुरक्षित जगह पर ले जाएं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह अभियान किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार जारी रहेगा।