चंदौली के सरकारी स्कूलों में AI वाली हाईटेक लैब, अपना भविष्य संवारेंगे 10 हजार से ज्यादा छात्र

चंदौली के 28 राजकीय स्कूलों की लैब अब एआई (AI) तकनीक से लैस होंगी। 10,178 छात्रों को प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ने और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। जानिए शिक्षा व्यवस्था में क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं।

 

28 राजकीय विद्यालयों के छात्र होंगे लाभान्वित

परीक्षा के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य

शिक्षकों को दिया गया विशेष तकनीकी प्रशिक्षण

10,178 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रयोगात्मक ज्ञान

चंदौली जिले में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुसार ढालने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब जिले के राजकीय हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों के छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी लेंगे। नए सत्र में इन बदलावों से उम्मीद की जा रही है कि चंदौली के सरकारी स्कूलों से निकलने वाले छात्र तकनीकी रूप से निजी स्कूलों के छात्रों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे।

लैब का होगा कायाकल्प: आधुनिक संसाधनों से लैस होंगे स्कूल
प्रशासन द्वारा जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में स्थापित कंप्यूटर और विज्ञान प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने की योजना तैयार की गई है। इन लैब में एआई से जुड़े नवीनतम उपकरण और सॉफ्टवेयर संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को सीधे तौर पर नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। विभाग ने इसके लिए शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षित कर दिया है।

10 हजार से अधिक छात्र होंगे लाभान्वित
आंकड़ों के अनुसार, जनपद में वर्तमान में संचालित 28 राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में कुल 10,178 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी विद्यार्थियों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। एआई आधारित शिक्षण प्रणाली लागू होने से न केवल उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी, बल्कि उन्हें कोडिंग, डेटा और तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के नए रास्ते भी मिलेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग का लक्ष्य विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक रूप से भी दक्ष बनाना है।

उपस्थिति पर कड़ा पहरा: 75% अनिवार्य नियम लागू
जहाँ एक ओर शिक्षा को आधुनिक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनुशासन को लेकर भी विभाग सख्त है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए निर्देश जारी किए हैं कि वार्षिक परीक्षा में बैठने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी की न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति होना अनिवार्य है। इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि पढ़ाई की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित की जा सके।

जिला विद्यालय निरीक्षक देवेन्द्र सिंह ने बताया कि, "एआई आधारित शिक्षण प्रणाली शिक्षा की गुणवत्ता में मील का पत्थर साबित होगी। आधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्र नई तकनीकों के प्रति जागरूक होंगे, जिससे उनके सीखने की क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा।"