जनगणना 2027 को लेकर मीडिया व इन्फ्लुएंसर्स की मीटिंग, 16 नवंबर से खुद भी दर्ज कर सकेंगे अपनी जानकारी

 

चंदौली में जनगणना 2027 को लेकर मीडिया व इन्फ्लुएंसर्स की अहम बैठक हुई। 16 नवंबर से सेल्फ-एन्यूमरेशन शुरू होगा। स्थानीय बोली में जागरूकता फैलाकर हर परिवार तक सटीक संदेश पहुँचाने की योजना है।

 
 

चंदौली में जनगणना 2027 की बैठक

स्थानीय भाषा में जागरूकता अभियान रणनीति

16 नवंबर से शुरू होगी स्वगणना

घर-घर पहुँचकर पूछे जाएँगे 40 सवाल

सही जानकारी से बनेगा विकास प्लान

भारत की जनगणना 2027 के दूसरे चरण को चंदौली जिले में पूरी तरह सफल बनाने के लिए गुरुवार, 5 नवंबर को एक अहम बैठक बुलाई गई। अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार की मौजूदगी में हुई इस बैठक में प्रिंट, डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य मकसद जनगणना का संदेश गांव, वार्ड, मोहल्ले और जिले के हर परिवार तक बेहद आसान भाषा में पहुँचाना था।

स्थानीय बोली में समझाया जाएगा जनगणना का महत्व
बैठक के दौरान इस बात पर खास जोर दिया गया कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में लोगों को उनकी अपनी क्षेत्रीय बोली और सहज भाषा में समझाया जाए। अधिकारियों ने कहा कि जब बात अपनी बोली में होती है, तो लोगों का भरोसा बढ़ता है और किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं रहती। इसके लिए सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे वीडियो, पोस्टर और जागरूकता सामग्री प्रसारित की जाएगी ताकि हर नागरिक आसानी से प्रक्रिया समझ सके।

16 नवंबर से मिलेगी खुद जानकारी दर्ज करने की सुविधा
बैठक में जनगणना की तारीखों की स्पष्ट जानकारी साझा की गई। नागरिकों के लिए 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक 'स्वगणना' (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प खुला रहेगा। यानी लोग खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच प्रगणक (गणनावर्कर) घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी स्वगणना आईडी संभालकर रखें।

40 सवालों का सही जवाब देना क्यों है जरूरी?
प्रगणक जब घर पहुँचेंगे तो वे कुल 40 तय सवाल पूछेंगे। प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इन सभी सवालों के बिल्कुल सटीक और सही जवाब दें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना सिर्फ लोगों को गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसी के आधार पर भविष्य की सड़कें, स्कूल, अस्पताल, बिजली और अन्य सरकारी योजनाएं तय होती हैं। सही आंकड़ों से ही देश और जिले के विकास का खाका तैयार किया जाता है।