चंदौली में 500 से अधिक पंचायत सहायकों का कटेगा मानदेय, सचिवालयों से नदारद मिलने पर एक्शन
चंदौली जिले के पंचायत सचिवालयों की ऑनलाइन उपस्थिति समीक्षा में 500 से अधिक पंचायत सहायक गायब मिले। डीपीआरओ ने सख्त रुख अपनाते हुए 80 प्रतिशत अनुपस्थित पंचायत सहायकों का एक दिन का मानदेय रोकने और 8 को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
500 से अधिक पंचायत सहायक मिले गायब
80 प्रतिशत सहायकों की ऑनलाइन हाजिरी नदारद
डीपीआरओ अविनाश कुमार की सख्त कार्रवाई
गैरहाजिर सहायकों का मानदेय रोकने का निर्देश
सरकारी सेवाओं के लिए भटक रहे ग्रामीण
ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ एक ही छत के नीचे आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत सचिवालयों की शुरुआत की गई थी। हालांकि, चंदौली जिले में पंचायत सहायकों की लगातार अनुपस्थिति के कारण यह पूरी व्यवस्था चरमराती हुई नजर आ रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी की जांच में खुलासा होने के बाद कार्रवाई की जा रही है।
हाल ही में जिले की 734 ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों की ऑनलाइन हाजिरी की समीक्षा की गई। इस जांच में बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जांच के दौरान करीब 80 प्रतिशत पंचायत सहायक पोर्टल पर अनुपस्थित पाए गए। महज 20 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
डीपीआरओ ने लिया कड़ा संज्ञान, मानदेय रोकने का दिया निर्देश
ऑनलाइन उपस्थिति की पोल खुलने के बाद प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अविनाश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 500 से अधिक अनुपस्थित पाए गए पंचायत सहायकों का एक दिन का मानदेय रोकने का निर्देश जारी कर दिया है।
इसके साथ ही डीपीआरओ ने समीक्षा के बाद अनुपस्थित पंचायत सहायकों पर विभागीय कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले आठ पंचायत सहायकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई से लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
डिजिटल हाजिरी की व्यवस्था से सामने आई हकीकत
शासन स्तर से पंचायत सचिवालयों के नियमित संचालन और पंचायत सहायकों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए ऑनलाइन हाजिरी की पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत सहायकों को निर्धारित समय पर पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्रामीणों को सचिवालय में जरूरी सेवाएं आसानी से मिल सकें और सहायक अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करें। लेकिन हालिया समीक्षा में 734 के सापेक्ष 500 से अधिक सहायकों का गायब मिलना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सरकारी सेवाओं के लिए ग्रामीणों को लगाने पड़ रहे चक्कर
पंचायत सहायकों की जिम्मेदारी केवल पंचायत भवन का ताला खोलने तक सीमित नहीं है। उन्हें ग्रामीणों के आय, जाति, निवास आदि जरूरी दस्तावेज और अभिलेख तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है। इसके अलावा विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं, सरकारी योजनाओं और प्रमाणपत्रों से जुड़ी जानकारियां ग्रामीणों को उपलब्ध कराना भी उन्हीं का काम है। सहायकों की लगातार अनुपस्थिति से ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सचिवालयों और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
नियमित निगरानी का दिया गया सख्त निर्देश
जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि पंचायत सहायकों को समय से सचिवालय में उपस्थित रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा में बड़ी लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने अधिकारियों को पंचायत सचिवालयों के सुचारू संचालन और पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति की नियमित रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया है, ताकि आम जनता को बिना किसी परेशानी के सभी सरकारी सुविधाएं गांव में ही मिल सकें।