चंदौली कॉन्क्लेव 2026: 'विकसित चंदौली' के लिए विशेषज्ञों का महामंथन शुरू, कॉन्क्लेव के पहले दिन उठा शिक्षा और चिकित्सा जगत का मुद्दा

चंदौली जनपद को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 'चंदौली कॉन्क्लेव 2026' का भव्य आगाज हो गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों की चुनौतियों पर विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर चर्चा की, ताकि जिले के भविष्य के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जा सके।

 

विकसित चंदौली के संकल्प के साथ तीन दिवसीय कॉन्क्लेव शुरू

शिक्षा को हब बनाने और कौशल विकास पर विशेष जोर

सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर सामंजस्य पर मंथन

स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने का बना प्लान

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास पर एकजुट हुए जनप्रतिनिधि

उत्तर प्रदेश के उभरते जनपद चंदौली को 'विकसित भारत' की तर्ज पर 'विकसित चंदौली' बनाने के संकल्प के साथ 'चंदौली कॉन्क्लेव 2026' का आज शानदार आगाज हो गया। बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस तीन दिवसीय कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य जिले के भविष्य का रोडमैप तैयार करना और विकास की चुनौतियों को दूर करना है। कार्यक्रम के पहले दिन जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, चिकित्सक और उद्यमी एक मंच पर आए।

शिक्षा जगत: प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक सुधार की दरकार
कॉन्क्लेव का पहला सत्र पूरी तरह शिक्षा जगत को समर्पित रहा। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि चंदौली को शिक्षा का हब बनाना है, तो हमें बुनियादी ढांचे के साथ-साथ शिक्षकों के कौशल विकास पर भी ध्यान देना होगा। निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से डॉ. विनय कुमार वर्मा और डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने तकनीकी शिक्षा और नवाचार के माध्यम से चंदौली के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का सुझाव दिया।

महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के मुद्दे पर शिक्षिका सुनीता तिवारी ने अपने विचार रखे। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षकों की समस्याओं को उठाया और जनप्रतिनिधियों से उन पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। सत्र में यह निष्कर्ष निकला कि कौशल विकास ही वह चाबी है जिससे जिले का युवा स्वावलंबी बन सकता है।

चिकित्सा जगत: सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सामंजस्य
शिक्षा के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कैसे सरकारी और निजी डॉक्टर मिलकर जिले के अंतिम व्यक्ति

तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचा सकते हैं। चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने अपने पेशे के प्रति नैतिक जिम्मेदारी की बात की, साथ ही स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों

को आने वाली सुरक्षा चुनौतियों और प्रशासनिक सहयोग की जरूरत पर भी बल दिया। चर्चा का मुख्य केंद्र यह रहा कि चंदौली में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे अत्याधुनिक बनाया जाए ताकि मरीजों को वाराणसी या अन्य शहरों की ओर रुख न करना पड़े।

उद्योग और स्टार्टअप: स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर


तीसरे सत्र का केंद्र बिंदु 'आत्मनिर्भर चंदौली' रहा। मुख्य विकास अधिकारी और उद्योग विभाग के अधिकारियों ने जिले में स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध

सरकारी योजनाओं और बैंकों से मिलने वाले सहयोग की जानकारी दी। उद्यमियों ने जिले में औद्योगिक संभावनाओं पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाले बनें।

राजनीतिक दलों और विचारकों का मिला साझा समर्थन


इस महामंथन में राजनीति और समाजसेवा से जुड़े कई बड़े चेहरे शामिल हुए। सांसद वीरेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव और मनोज सिंह काका ने विकास के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। इनके अलावा कांग्रेस पार्टी के नारायणमूर्ति ओझा सहित सपा-बसपा और कांग्रेस के अन्य पदाधिकारियों ने भी शिरकत की।

कार्यक्रम में मथुरा से आए स्वामी लोकेशानंद जी, लखनऊ से सूचना विभाग के पूर्व उपनिदेशक दिनेश गर्ग, पूर्व चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार उपाध्याय की उपस्थिति ने चर्चा को और अधिक समृद्ध बनाया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जिले के विकास के लिए सामूहिक प्रयास करना समय की मांग है।

कॉन्क्लेव के आयोजकों का मानना है कि इन तीन दिनों में जो सुझाव और निष्कर्ष निकलेंगे, उन्हें एक विस्तृत रिपोर्ट के रूप में शासन को भेजा जाएगा। कार्यक्रम में युवाओं की भारी भागीदारी यह दर्शाती है कि चंदौली का भविष्य बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है। अगले दो दिनों में कृषि, पर्यटन और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी रहेगी।