चंदौली जिले में दिशा की बैठक में भारी बवाल, सपा सांसद के प्रतिनिधि को रोका, भाजपा विधायक के प्रतिनिधि को मिली इंट्री!

चंदौली में दिशा समिति की बैठक के दौरान प्रशासनिक भेदभाव का बड़ा आरोप लगा है। सपा सांसद के प्रतिनिधि और मीडिया को बैठक से बाहर रखने पर विपक्षी नेताओं ने नाराजगी जताई है, जिससे सियासी बवाल खड़ा हो गया है।

 

दिशा की बैठक में बड़ा विवाद

सपा सांसद के प्रतिनिधि को रोका

भाजपा विधायक के प्रतिनिधि को इंट्री

मीडिया को भी रखा बाहर

प्रशासन पर भेदभाव के आरोप

चंदौली जिला मुख्यालय पर आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलेआम भेदभाव के आरोप लगे। विकास कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में मचे इस घमासान की चर्चा अब पूरे जिले में जोरों पर है।

आरोप है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह के अधिकृत प्रतिनिधि को बैठक कक्ष (सभागार) में जाने से प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ मना कर दिया। वहीं दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष यानी भाजपा विधायक के प्रतिनिधि को बड़े आराम से बैठक में शामिल होने की इजाजत दे दी गई।

दिशा की बैठक में बड़ा विवाद

सपा सांसद के प्रतिनिधि को रोका

भाजपा विधायक के प्रतिनिधि को इंट्री

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— Vijay Kumar Tiwari (@vijayku49133779) June 16, 2026


सांसद प्रतिनिधि को रोका, विधायक प्रतिनिधि को इंट्री
इस घटना के सामने आते ही विपक्षी नेताओं और सांसद समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि दिशा समिति की बैठक की मुख्य कमान ही सांसद के स्तर से जुड़ी होती है। ऐसे में उनके ही अधिकृत प्रतिनिधि के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार करना लोकतांत्रिक नियमों और परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है। विपक्ष ने जिला प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया कि अधिकारी पूरी तरह से सत्ता के दबाव में काम कर रहे हैं। इस भेदभावपूर्ण रवैये से प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भारी गरमागरमी बढ़ गई है।

पत्रकारों को भी रखा बैठक से बाहर
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इस बार बैठक से मीडिया को भी पूरी तरह दूर रखा गया। कलेक्ट्रेट में कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को बैठक कक्ष के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन के इस फैसले से स्थानीय मीडिया कर्मियों में भी भारी नाराजगी देखने को मिली।
पत्रकारों का कहना है कि जिले के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों की सही जानकारी जनता तक पहुंचाने में मीडिया की बड़ी भूमिका होती है। बैठक को इस तरह बंद कमरे में गुपचुप तरीके से कराने से प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री के कार्यकाल की चर्चा तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में पुरानी चर्चाएं भी तैरने लगीं। स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने याद दिलाया कि जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय का कार्यकाल था, तब दिशा की बैठकों में ऐसा माहौल नहीं होता था। उनके समय में मीडिया को बैठक की पूरी कार्यवाही में रहने और उसे कवर करने की पूरी आजादी दी जाती थी। लेकिन इस बार विपक्षी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को बाहर रखने के इस नए निर्णय ने नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर जिले की राजनीति पूरी तरह गरमाई हुई है।