धरती माता बचाओ अभियान : चंदौली में उर्वरकों की कालाबाजारी और तस्करी पर डीएम सख्त, 14 लाइसेंस रद्द
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने कलेक्ट्रेट में "धरती माता बचाओ निगरानी समिति" की बैठक की। उन्होंने उर्वरकों की ओवर रेटिंग, तस्करी और औद्योगिक डाइवर्जन पर प्रभावी अंकुश लगाने के कड़े निर्देश दिए।
धरती माता बचाओ निगरानी समिति" की प्रथम बैठक संपन्न
उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने हेतु सघन छापेमारी का निर्देश
अब तक 129 छापे, 14 लाइसेंस निलंबित/निरस्त और 2 FIR दर्ज
ग्राम और तहसील स्तर पर निगरानी समितियों का गठन
जैविक खाद और प्राकृतिक खेती के लिए जागरूकता पर जोर
चंदौली जिले मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग पर लगाम लगाने के उद्देश्य से "धरती माता बचाओ अभियान" के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति की प्रथम बैठक शुक्रवार देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि उर्वरकों की कालाबाजारी, ओवर रेटिंग और औद्योगिक डाइवर्जन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कठोर कार्रवाई: 14 लाइसेंस रद्द, 2 फर्मों पर FIR
जिलाधिकारी ने बैठक में बताया कि जनपद में उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण हेतु लगातार छापेमारी की जा रही है। अब तक कुल 129 छापे मारे जा चुके हैं, जिनमें से 07 उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए और 7 लाइसेंस पूरी तरह निरस्त कर दिए गए। अमानक उर्वरक मिलने पर 02 फर्मों के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है।
त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र का गठन
अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार के निर्देशानुसार समितियां गठित की गई हैं:--
1-ग्राम स्तरीय समिति: ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में गठित इस समिति में लेखपाल, ड्रोन दीदी, पंचायत सहायक और प्रगतिशील किसान शामिल होंगे। यह समिति उर्वरकों की तस्करी और गैर-कृषि उपयोग की गोपनीय जानकारी जिला प्रशासन को देगी।
2-तहसील स्तरीय समिति: उपजिलाधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में यह समिति ग्राम स्तर से प्राप्त सूचनाओं पर कार्रवाई करेगी और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
3-जिला स्तरीय समिति: यह संपूर्ण अभियान की नियमित समीक्षा करेगी।
किसानों को जागरूकता और विक्रेताओं को चेतावनी
डीएम ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) के प्रति किसानों को जागरूक करें और उन्हें जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने हेतु प्रेरित करें। उन्होंने थोक व फुटकर विक्रेताओं को चेतावनी दी कि यदि निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर खाद बेची गई या खाद के साथ अन्य उत्पाद की 'टैगिंग' की गई, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी और थोक विक्रेता उपस्थित रहे।