ड्रेन की सफाई न होने से 50 गांवों में जलभराव की समस्या, कई सालों से किसान परेशान
चंदौली के घोसवां स्थित ड्रेन नंबर-2 की सफाई न होने से 50 गांवों के किसान जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। 14 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद काम शुरू न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
घोसवां ड्रेन नंबर-2 की सफाई में देरी
50 गांवों की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित
बंधी डिवीजन की कार्यशैली पर सवाल
किसानों ने की तत्काल सफाई की मांग
जलभराव से खेती-किसानी पर बुरा असर
चंदौली जिले के बरहनी विकासखंड स्थित घोषवा में 'ट्रेन नंबर-2' की दुर्दशा ने लगभग 50 गांवों के किसानों की नींद उड़ा दी है। लंबे समय से इस ड्रेन की सफाई न होने के कारण जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि ड्रेन में पानी की निकासी रुकने से खेतों में जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिसका सीधा असर उनकी रबी और खरीफ की फसलों पर पड़ रहा है।
लाखों का बजट, धरातल पर काम शून्य
किसान नेता दरोगा राय ने बताया कि पिछले साल नवंबर में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर जेसीबी के जरिए आंशिक सफाई कराई थी, जिससे कुछ राहत मिली थी। वहीं, बंधी डिवीजन द्वारा सितंबर माह में ही इस ड्रेन की 7 किलोमीटर की सफाई के लिए 14 लाख 27 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के एक्सईएन सुरेश आजाद ने मार्च तक काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सफाई कार्य शुरू नहीं हो सका है।
बाधित है पानी का प्रवाह
ड्रेन की खुदाई और सफाई न होने से डैना, भैंसा कला, भैंसउर, गोरखा, इमलिया, मुलकपुवा, भरहुलिया, चिल्हारी, कपसिया, दिग्घी, घोषवा, केतहनी और बाकरपुर सहित दर्जनों गांव प्रभावित हैं। किसानों के अनुसार, घोषवा से सिकठा गांव तक ड्रेन का मार्ग संकरा हो चुका है और रेलवे पटरी से गिरी गिट्टी के कारण पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित है।
विभाग का तर्क और ग्रामीणों की मांग
इस मामले पर जब एक्सईएन बंधी डिवीजन सुरेश आजाद से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में उपलब्ध बजट किसानों की मांग के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि विभाग ने नया स्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है और धन मिलते ही सफाई कार्य शुरू कराया जाएगा। वहीं, सत्येंद्र राय, मनीष, रिंकू यादव और बबलू उपाध्याय सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ड्रेन की सफाई नहीं कराई गई, तो उन्हें बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।