विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में दिल्ली राजनाथ सिंह के घर पहुंचे चंदौली के किसान, देखना है क्या मदद करते हैं रक्षा मंत्री 

 

चंदौली में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। उपजाऊ कृषि भूमि बचाने के लिए परेवा, नौबतपुर और बरठी समेत कई गांवों के किसानों ने दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर पैरवी की गुहार लगाई है।

 
 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले किसान

विंध्य एक्सप्रेसवे का भारी विरोध शुरू

धान का कटोरा छिनने की आशंका

सैयदराजा-जमानिया सिक्स लेन की मांग

गांवों में सर्वे का तीखा विरोध

चंदौली जिले में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway) को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। अपनी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए परेवा, नौबतपुर, बरठी कमरौर, चिरईगांव और रामपुर सहित दर्जनों गांवों के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा। वहां किसानों ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर एक्सप्रेसवे से होने वाले बड़े नुकसान पर चर्चा की और सरकार के सामने किसानों के पक्ष में पैरवी करने की मांग की।

धान का कटोरा छिनने का डर
चंदौली को 'धान का कटोरा' कहा जाता है। किसानों का आरोप है कि यह एक्सप्रेसवे बरहनी और नियामताबाद ब्लॉक के सबसे उपजाऊ इलाकों से होकर गुजरेगा। इससे उनकी कीमती कृषि भूमि छिन जाएगी और वे भूमिहीन हो जाएंगे, जिससे आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, किसानों ने आशंका जताई है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण से कर्मनाशा नदी और अन्य बांधों के तटीय क्षेत्रों के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा।

पहले से मार्ग है, तो नया क्यों?
ग्रामीणों का तर्क है कि क्षेत्र में पहले से ही अच्छे सड़क मार्ग मौजूद हैं, इसलिए नए एक्सप्रेसवे की कोई जरूरत नहीं है। 'भूमि बचाओ संघर्ष समिति' और 'भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन' के नेतृत्व में किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। जब अधिकारी तेजोपुर और अन्य गांवों में जमीन का सर्वे करने पहुंचे, तो किसानों के भारी विरोध के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। किसानों की मांग है कि इस प्रोजेक्ट को रद्द कर सैयदराजा-जमानिया मार्ग को ही सिक्स-लेन में बदला जाए।

चंदौली के लाल पर टिकी निगाहें
किसानों ने स्थानीय सांसदों और विधायकों के बाद अब सीधे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने अपनी गुहार रखी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि चंदौली के लाल कहे जाने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने गृह जनपद के किसानों की इस गंभीर मांग पर कितनी दमदारी से विचार करते हैं और उनकी आवाज सरकार तक कैसे पहुंचाते हैं।