चंदौली में 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही गंगा, चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा जलस्तर, 50 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

 

चंदौली में गंगा का जलस्तर 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। बलुआ घाट के कई स्थान पानी में डूब चुके हैं। धानापुर और कुंडा खुर्द में तेज कटान से उपजाऊ जमीन और मकान नदी में समा रहे हैं, जिससे 50 गांवों में हड़कंप है।

 
 

2 सेमी प्रति घंटे से बढ़ रहा गंगा जलस्तर

चेतावनी बिंदु से 1.26 मीटर नीचे बह रही नदी

बलुआ घाट का चेंजिंग रूम और गंगा मंदिर डूबे

धानापुर और कुंडा खुर्द में गंगा का तेज कटान

चंदौली प्रशासन ने बनाईं 41 बाढ़ चौकियां

चंदौली जिले में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर डराने लगा है। पिछले कुछ दिनों से गंगा के पानी में तेजी से बढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार रात 8:00 बजे गंगा में 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी का बढ़ाव रिकॉर्ड किया गया। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 69.00 मीटर पर पहुंच गया है, जबकि यहां चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरा बिंदु 71.26 मीटर तय है। भले ही नदी अभी चेतावनी बिंदु से 1.26 मीटर नीचे बह रही हो, लेकिन जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उससे तटवर्ती इलाकों के लोग बुरी तरह सहमे हुए हैं।

बलुआ घाट पर डूबे मंदिर और चेंजिंग रूम
गंगा में लगातार हो रहे जलस्तर में इजाफे की वजह से प्रसिद्ध बलुआ घाट पर बना पुराना और नया चेंजिंग रूम, शवदाह स्थल, यात्री विश्रामालय और गंगा मंदिर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। घाट का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाने के कारण यहां आने वाले शवयात्रियों और स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो बहुत जल्द बाढ़ का पानी आसपास के रिहाइशी इलाकों और गांवों में दाखिल हो जाएगा।

धानापुर और कुंडा खुर्द में तेज हुआ नदी का कटान
बाढ़ के खतरे के बीच तटवर्ती इलाकों में गंगा का कटान सबसे बड़ी तबाही लेकर आया है। कुंडा खुर्द और धानापुर के इलाकों में नदी तेजी से जमीनों को अपने आगोश में ले रही है। बीते बुधवार की देर रात कुंडा खुर्द में गंगा किनारे डीह बाबा मंदिर के पास मौजूद वर्षों पुराना पीपल का पेड़ तेज बहाव में समा गया।

ग्रामीणों का कहना है कि दो साल पहले सिंचाई विभाग द्वारा कराया गया जिओ कटर का काम भी कई जगहों पर बिखर चुका है, जिससे कटान को रोकना नामुमकिन हो रहा है। धानापुर में किसानों की उपजाऊ फसल वाली जमीनें रोज नदी में विलीन हो रही हैं। नरौली गांव के कई लोगों के रिहाइशी मकान पहले ही गंगा कटान की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे अब ग्रामीणों के सामने गांव छोड़कर पलायन करने की नौबत आ गई है।

बाढ़ से प्रभावित होते हैं जिले के 50 गांव
हर साल गंगा में आने वाले उफान की वजह से चंदौली जिले के करीब 50 गांव सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। इनमें चहनियां, धानापुर, सकलडीहा और नियामताबाद विकास खंड के ग्रामीण इलाके शामिल हैं। कांवर, महुअरिया, बिसुपुर, महुारीखास, सरायन, बलुआ, महुरअरकला, हरधन जुड़ा, विजयी के पूरा, गणेश पूरा, टांडा, बड़गांव, तीरगांवा, हसनपुर, नादी, निधौरा, हिंगुतरगढ़, रायपुर, कैली, कुरहना, भूपौली, बहादुरपुर, मढिया, कुंडाखुर्द, कुंडा कला, डांडी, मलोखर, रौना और सहजौर जैसे गांवों के किसानों और निवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।

प्रशासन अलर्ट, बनाई गईं 41 बाढ़ चौकियां
गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की त्रासदी से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग के सख्त निर्देशों पर बाढ़ प्रभावित संवेदनशील इलाकों में 41 बाढ़ चौकियों की स्थापना कर दी गई है। एसडीएम की सीधी निगरानी में लेखपालों और सेक्रेटरी के अलावा अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों की 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही संबंधित तहसीलदारों को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।