चंदौली में CJI सूर्यकांत ने CM योगी से मांगी खास सुविधाएं, जानें एकीकृत कोर्ट शिलान्यास पर किसने क्या कहा
चंदौली में 6 जिलों के एकीकृत कोर्ट परिसरों के शिलान्यास के दौरान CJI और CM योगी ने न्याय प्रणाली को नया आयाम दिया। इस मौके पर CJI सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री से हर कैंपस में दो विशेष सुविधाओं की मांग की। पढ़ें, दिग्गजों के भाषण के मुख्य अंश।
मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री का ऐतिहासिक संबोधन
CJI सूर्यकांत की मुख्यमंत्री से विशेष मांग
6 जिलों में एकीकृत कोर्ट का शिलान्यास
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे कोर्ट कैंपस
चंदौली से शुरू हुआ न्यायिक सुशासन का सफर
उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में आज जनपद चंदौली से एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। भारत के मुख्य न्यायमूर्ति (CJI), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया के लिए 'एकीकृत न्यायालय परिसरों' (Integrated Court Complexes) का भव्य शिलान्यास किया गया। यह कदम प्रदेश की अदालती कार्यवाही को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
सभी का एक ही सुर में कहना था कि 'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' का यह मॉडल उत्तर प्रदेश में कानून के राज को और अधिक प्रभावी बनाएगा। चंदौली में आयोजित इस गरिमामयी समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में प्रदेश की अदालतें केवल न्याय का केंद्र ही नहीं, बल्कि वादियों के लिए सुविधाओं का केंद्र भी बनेंगी।
नीचे कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं के संबोधन के मुख्य अंश दिए गए हैं:--
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस माननीय न्यायमूर्ति श्री अरुण भंसाली
न्यायूमूर्ति भंसाली ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि त्वरित और सुलभ न्याय ही कानून के शासन की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय तक सार्थक पहुंच तभी संभव है जब हमारे पास आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल न्यायिक बुनियादी ढांचा हो। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि अभी जिला अदालतें, वाणिज्यिक न्यायालय और न्यायाधिकरण एक ही जिले में अलग-अलग स्थानों से संचालित होते हैं, जिससे समन्वय और सुरक्षा की समस्या आती है।
उन्होंने बताया कि यह एकीकृत मॉडल इन सभी समस्याओं का समाधान करेगा, जहाँ सभी न्यायिक संस्थाएं एक ही छत के नीचे होंगी। उत्तर प्रदेश के 10 प्राथमिक जनपदों में इसे लागू किया जा रहा है, जिनमें से आज 6 जनपदों के लिए ₹1635 करोड़ का बजट आवंटित किया जा चुका है और 250 एकड़ से अधिक भूमि पर 195 कोर्ट रूम तैयार किए जाएंगे। यह मॉडल देश के लिए एक उदाहरण बनेगा। प्रथम चरण में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया के लिए 1635 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह परिसर न केवल भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि इसमें सुरक्षा, समन्वय और प्रशासनिक सुगमता के विश्वस्तरीय मानक होंगे।
2. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री विक्रमनाथ
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ ने बड़े ही आत्मीय भाव से अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक साफ-सुथरा और आधुनिक कार्य वातावरण न्याय की गुणवत्ता को बढ़ाता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई जिलों में अदालतें 100-150 साल पुरानी इमारतों में चल रही हैं, जहाँ अधिवक्ताओं और वादियों की बढ़ती संख्या के कारण अब विस्तार की जगह नहीं बची है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे नए परिसरों के निर्माण का विरोध न करें, क्योंकि इसमें उनके लिए बेहतर चेंबर्स, लाइब्रेरी, कैंटीन और पार्किंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
उन्होंने वाराणसी के अधिवक्ताओं के लिए भी एक विशेष संदेश दिया कि यदि वे सहमत हों, तो जेल की 25 एकड़ जमीन पर एक भव्य कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाया जा सकता है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने प्रेरक पंक्तियाँ पढ़ीं, "अदालत सूर्य है वो न्याय का जिससे उजाला है... जहन में संविधान और दिल में हिंदुस्तान रखती है।"
3. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए एक सुदृढ़ न्यायपालिका अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ईज ऑफ लिविंग' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह एकीकृत परिसर का मॉडल तैयार किया गया है, जिसकी प्रेरणा उन्हें भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से मिली थी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने पहले चरण के 6 जनपदों के लिए धनराशि अवमुक्त कर दी है और एलएंडटी (L&T) जैसी संस्थाएं निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करेंगी।
उन्होंने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि अब उन्हें टूटे हुए चेंबर्स में नहीं बैठना पड़ेगा, बल्कि एक उच्च स्तरीय हाई-राइज बिल्डिंग में उनके लिए सभी सुविधाएं होंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सरकार के पास इच्छाशक्ति और धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने वाराणसी समेत हर जिले में ऐसे मॉडल परिसरों के निर्माण में पूर्ण सहयोग का वादा किया।
4. भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत
मुख्य न्यायमूर्ति ने इस पहल को 'न्याय के उपभोक्ता' (आम आदमी) के लिए एक बड़ा उपहार बताया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान ने जिला न्यायपालिका को जो महत्वपूर्ण स्थान दिया है, उसे मजबूत करना ही 'एक्सेस टू जस्टिस' के सपने को पूरा करना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के इस मॉडल की सराहना करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक 'बेंचमार्क' करार दिया और कहा कि वे अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
उन्होंने दो महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए: पहला, प्रत्येक जिला न्यायालय में महिला अधिवक्ताओं के लिए एक अलग बार रूम का निर्माण हो। दूसरा, परिसर के भीतर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की जाए, ताकि बुजुर्ग वादियों और कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत चिकित्सा मिल सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये परिसर अगले 50 वर्षों की जरूरतों को पूरा करेंगे।
5. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री महेश चंद्र त्रिपाठी
न्यायमूर्ति त्रिपाठी ने आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि यह केवल ईंट और पत्थर की नींव नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों और विश्वास की नींव है। उन्होंने इस परियोजना को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'एकात्म मानववाद' के दर्शन से जोड़ते हुए कहा कि न्याय मानवीय गरिमा से जुड़ा एक संवेदनशील दायित्व है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रशासनिक समर्थन के बिना ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना संभव नहीं थी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि ये आधुनिक परिसर न केवल दक्षता बढ़ाएंगे, बल्कि एक सुरक्षित और गरिमामय वातावरण भी प्रदान करेंगे, जिससे न्याय की दूरी कम होगी और प्रक्रिया सरल बनेगी।