ऐसा कोर्ट कांप्लेक्स बनाने के पीछे CM योगी की है ऐसी सोच, जानिए मुख्यमंत्री  पूरे भाषणा की खास बातें

 

उत्तर प्रदेश के 6 जिलों में ₹1635 करोड़ की लागत से बनने वाले 'एकीकृत न्यायालय परिसरों' की नींव रख दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वकीलों को आधुनिक चैंबर और परिसरों में डिस्पेंसरी देने का वादा किया है। जानिए कैसे यह प्रोजेक्ट आम आदमी को आसान न्याय दिलाएगा।

 
 

₹1635 करोड़ की लागत से होगा निर्माण

6 जिलों में एकीकृत कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास

अधिवक्ताओं को मिलेंगे हाई-राइज बिल्डिंग में चैंबर्स

हर कोर्ट कैंपस में बनेगा प्राथमिक चिकित्सा केंद्र

महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम की सुविधा

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उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। जनपद चंदौली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 6 जिलों—चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया—में 'एकीकृत न्यायालय परिसरों' (Integrated Court Complexes) का शिलान्यास किया गया। भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति में ₹1635 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन 
 समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक सुदृढ़ न्यायपालिका का होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ईज ऑफ लिविंग' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए यह एकीकृत परिसर मॉडल तैयार किया गया है। सीएम योगी ने घोषणा की कि इस परियोजना के पहले चरण के लिए धनराशि जारी कर दी गई है और निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी (L&T) जैसी अनुभवी संस्थाओं को सौंपी गई है, ताकि कार्य समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा हो सके।

अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक हाई-राइज चैंबर्स 
अधिवक्ताओं की समस्याओं को समझते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अब वकीलों को जर्जर या टूटे हुए चैंबर्स में बैठकर कार्य करने की आवश्यकता नहीं होगी। नए परिसरों में उनके लिए विशेष रूप से 'हाई-राइज बिल्डिंग्स' तैयार की जाएंगी, जहाँ सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए राज्य सरकार के पास न तो इच्छाशक्ति की कमी है और न ही बजट की।

CJI सूर्यकांत के सुझावों पर तत्काल मुहर कार्यक्रम के दौरान माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

1-महिला बार रूम: प्रत्येक जिला न्यायालय परिसर में महिला अधिवक्ताओं के लिए एक पृथक और सुरक्षित बार रूम का निर्माण किया जाएगा।

2-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: बुजुर्ग वादियों, कर्मचारियों और वकीलों की सुरक्षा के लिए परिसर के भीतर ही एक 'प्राइमरी हेल्थ सेंटर' स्थापित होगा, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।

'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' का सपना होगा साकार इस परियोजना का मूल उद्देश्य वादियों को एक ही छत के नीचे सभी कानूनी समाधान उपलब्ध कराना है। इन हाई-टेक परिसरों के बन जाने से लोगों को अलग-अलग कोर्ट के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और आधुनिक तकनीक के साथ ये कॉम्प्लेक्स उत्तर प्रदेश की न्यायिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल देंगे। वाराणसी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी भविष्य में इसी तर्ज पर मॉडल परिसरों का विस्तार किया जाएगा।