अधिवक्ताओं के सालों के संघर्ष का अपमान,  चंदौली में कोर्ट उद्घाटन के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर वकीलों का प्रदर्शन

 

चंदौली में नवनिर्मित इंटीग्रेटेड कोर्ट परिसर का उद्घाटन समारोह उस वक्त अखाड़ा बन गया जब बैठने की व्यवस्था को लेकर अधिवक्ता भड़क उठे। भाजपा नेताओं को फ्रंट रो में जगह देने और वकीलों की अनदेखी पर जमकर नारेबाजी हुई। जानिए क्या है पूरा विवाद।

 
 

इंटीग्रेटेड कोर्ट परिसर के उद्घाटन में हंगामा

भाजपा पदाधिकारियों को आगे बिठाने पर विवाद

अधिवक्ताओं ने सालों के संघर्ष की उपेक्षा का लगाया आरोप

जिला जज और वरिष्ठ वकीलों की समझाइश से शांत हुआ मामला

न्यायिक गरिमा और प्रोटोकॉल पर उठे गंभीर सवाल

चंदौली जिले में बहुप्रतीक्षित इंटीग्रेटेड कोर्ट परिसर के उद्घाटन समारोह में उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय अधिवक्ता बैठने की व्यवस्था को लेकर बिफर पड़े। कार्यक्रम स्थल पर जैसे ही अधिवक्ताओं ने देखा कि भाजपा पदाधिकारियों को अग्रिम पंक्ति (फ्रंट रो) में बैठाया गया है, उनका गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते पंडाल में नारेबाजी शुरू हो गई और उद्घाटन की औपचारिकताओं के बीच भारी शोर-शराबा होने लगा।

'हमारे संघर्ष का हुआ अपमान' - अधिवक्ता 
विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का तर्क था कि इस इंटीग्रेटेड कोर्ट परिसर का निर्माण उनके वर्षों के लंबे संघर्ष, अनगिनत आंदोलनों और शासन स्तर पर किए गए पत्राचार का परिणाम है। वकीलों ने आरोप लगाया कि जिस परिसर के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी, उसके उद्घाटन समारोह में ही उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया। अधिवक्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्यायिक गरिमा वाले कार्यक्रमों को 'राजनीतिक मंच' में तब्दील करना कतई उचित नहीं है।

अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत 
हंगामे की गंभीरता को देखते हुए जिला जज, शासकीय अधिवक्ता और कई वरिष्ठ वकीलों ने मोर्चा संभाला। नाराज अधिवक्ताओं को समझाने के लिए काफी देर तक बातचीत का दौर चला। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अधिवक्ताओं का सम्मान सर्वोपरि है। काफी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा शांत हुआ और कार्यक्रम की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जा सका। हालांकि, इस घटना ने प्रशासनिक प्रबंधन और प्रोटोकॉल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

न्यायिक गरिमा पर उठी चर्चा 
इस हंगामे के कारण कार्यक्रम में मौजूद अतिथि और न्यायिक अधिकारी भी कुछ देर के लिए असहज नजर आए। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे किसी भी आयोजन में उनके योगदान और वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल, चंदौली में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर क्यों एक ऐतिहासिक उपलब्धि के जश्न में समन्वय की कमी भारी पड़ गई।