केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की पहल: चंदौली के 80 से ज्यादा किसानों को बांटे गए आम, आंवला और अमरूद के पौधे
कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली में अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए फलदार पौधों के प्रदर्शन और पौध वितरण का आयोजन हुआ। 80 से अधिक किसानों को आम, अमरूद, आंवला, नींबू व बेल के उन्नत पौधे बांटे गए।
चंदौली कृषि विज्ञान केंद्र पौध वितरण
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ पहल
अनुसूचित जाति किसानों को पौध वितरण
फलदार पौधों की वैज्ञानिक खेती जानकारी
चंदौली के किसानों को मिली ट्रेनिंग
चंदौली जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में 8 अगस्त 2026 को अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए “उपोष्ण बागवानी की फल फसलों की किस्मों का प्रक्षेत्र प्रदर्शन” एवं पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम भा.कृ.अनु.प. केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा-लखनऊ द्वारा अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्रीय फल समन्वित अनुसंधान परियोजना की अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित किया गया था।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को बागवानी से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना और उन्हें पोषण सुरक्षा प्रदान करना है।
किसानों को मिले आम, आंवला और अमरूद के उन्नत पौधे
आयोजन के दौरान उपस्थित किसानों को आम, आंवला, नींबू, बेल और अमरूद की उन्नत व बेहतर किस्मों के पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ से पधारे प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार सिंह रहे। केवीके चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस मौके पर उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. अभय दीप गौतम, डॉ. रितेश गंगवार, डॉ. प्रतीक सिंह, डॉ. चंदन सिंह और डॉ. जयप्रकाश समेत कई अन्य कृषि वैज्ञानिक भी मौजूद रहे।
80 से अधिक किसानों ने ली वैज्ञानिक खेती की जानकारी
कार्यक्रम में बिछिया कला, धानापुर, अंबेडकरगांव, हिनौता, भतीजा, बरौनी, बरहनी और बर्थाराकला जैसे विभिन्न गांवों से आए 80 से ज्यादा अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिला किसानों की संख्या काफी अधिक थी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किसानों को फलदार पौधों की वैज्ञानिक रोपण विधि, पोषण प्रबंधन तथा कीट और बीमारियों से बचाव के तरीके विस्तार से बताए। उन्होंने बताया कि आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान फलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बढ़ा सकते हैं।
मशरूम खेती की ट्रेनिंग की उठी मांग
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वरिष्ठ शोध सहायक डॉ. कुलदीप, नरेंद्र मिश्र और वाईपी सर्वेश कुमार व उज्ज्वल ने भी किसानों से संवाद किया।
वैज्ञानिकों ने भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। संवाद के दौरान कई स्थानीय किसानों ने बटन मशरूम की खेती के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाने की भी मांग रखी।