स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल: बिना विज्ञापन और शासनादेश के ही कर दी MCTS ऑपरेटर की भर्ती, RTI में हुआ खुलासा
चंदौली स्वास्थ्य विभाग में एमसीटीएस ऑपरेटर की नियुक्ति को लेकर फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे का दावा है कि बिना किसी शासनादेश और विज्ञापन के ही यह नियुक्ति नियमों के खिलाफ जाकर की गई है।
स्वास्थ्य विभाग में नियमों के विपरीत हुई भर्ती
आरटीआई से मिली जानकारी के बाद खुला मामला
बिना शासनादेश और अधिकृत पत्र के नियुक्ति
जिला स्तर पर नहीं निकाला गया कोई विज्ञापन
उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की उठी मांग
चंदौली जिले के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर नियुक्तियों को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में एमसीटीएस (मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) ऑपरेटर की नियुक्ति को लेकर बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे हैं। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे ने इस पूरी चयन प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ और गैरकानूनी बताते हुए शासन से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
आरटीआई के खुलासे से हड़कंप
अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे का कहना है कि उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सीएमओ कार्यालय से इस भर्ती से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। आरटीआई से जो जानकारियां और जवाब सामने आए हैं, उससे यह पूरा मामला पूरी तरह संदिग्ध और नियमों के विपरीत नजर आ रहा है। उनका साफ आरोप है कि इस भर्ती के लिए न तो शासन की तरफ से कोई रोस्टर या शासनादेश जारी हुआ और न ही कोई अधिकृत पत्र विभाग के पास मौजूद है।
बिना विज्ञापन और आवेदन के ही दे दी नौकरी
शिकायतकर्ता ने पुलिसिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए जिला स्तर पर बाकायदा विज्ञापन निकाला जाता है और बेरोजगार युवाओं से आवेदन मांगे जाते हैं। लेकिन इस मामले में पारदर्शिता को ताक पर रखकर बिना किसी विज्ञापन और बिना कोई तय प्रक्रिया अपनाए सीधे चहेतों को नौकरी पर रख लिया गया, जो सरकारी नियमों का सरेआम उल्लंघन है।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक का बहाना
अधिवक्ता के अनुसार, जब इस मनमानी नियुक्ति को लेकर विभाग से जवाब मांगा गया तो सीएमओ कार्यालय की ओर से 30 जुलाई 2021 को आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई। अधिवक्ता का दावा है कि केवल स्थानीय स्तर की समिति की बैठक का प्रस्ताव बनाकर बिना शासन की अंतिम स्वीकृति के इतनी बड़ी नियुक्ति नहीं की जा सकती।
शासन को भेजा गया शिकायत पत्र
अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे ने इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोलने के लिए उत्तर प्रदेश शासन को एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजा है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए दोषी अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जानी बेहद जरूरी है। फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की तरफ से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।