चिकित्सा क्षेत्र में चंदौली की बड़ी छलांग: मेडिकल कॉलेज में पहली बार दूरबीन विधि से सफल हर्निया ऑपरेशन
चंदौली राजकीय मेडिकल कॉलेज ने स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक मशीन के जरिए पहली बार हर्निया की सफल सर्जरी की गई। अब स्थानीय मरीजों को कम दर्द और जल्द रिकवरी वाली विश्वस्तरीय सर्जरी सुविधाएं जिले में ही उपलब्ध होंगी।
चंदौली में पहली बार दूरबीन विधि से हर्निया का सफल ऑपरेशन
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने रचा चिकित्सा क्षेत्र में नया इतिहास
अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक मशीन से मरीजों को मिली बड़ी राहत
मरीज को छोटे चीरे और कम दर्द के साथ मिली अस्पताल से छुट्टी
बड़े शहरों जैसी आधुनिक सर्जरी अब चंदौली मेडिकल कॉलेज में संभव
चंदौली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सोमवार का दिन मील का पत्थर साबित हुआ। स्थानीय राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहली बार लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक का उपयोग करते हुए हर्निया की सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल कॉलेज के गौरव को बढ़ाया है, बल्कि जिले के हजारों मरीजों के लिए बेहतर और आधुनिक इलाज की उम्मीदें भी जगा दी हैं।
विशेषज्ञ टीम की कुशल देखरेख में हुआ ऑपरेशन
सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस सफल सर्जरी में डॉ. रोहित सिंह, डॉ. नैंसी पारुल और डॉ. प्रवीण की मुख्य भूमिका रही। वहीं, मरीज की सुरक्षा और बेहोशी की प्रक्रिया को डॉ. अजय प्रकाश एवं डॉ. जी.पी. मौर्या (एनेस्थीसिया टीम) ने कुशलतापूर्वक संभाला। यह ऑपरेशन बिहार के मोहनिया (तुलसीपुर) निवासी 21 वर्षीय युवक रोहित चौबे का किया गया, जो लंबे समय से इस समस्या से ग्रसित था।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्या हैं फायदे?
पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, इस विधि में शरीर पर बहुत ही छोटा चीरा लगाया जाता है, जिससे कई फायदे होते हैं....
* मरीज को सर्जरी के दौरान और बाद में दर्द कम होता है।
* रक्तस्राव (Bleeding) न के बराबर होता है।
* संक्रमण का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
* मरीज बहुत कम समय में स्वस्थ होकर घर लौट सकता है।
प्राचार्य की दूरगामी सोच का सुखद परिणाम
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय प्राचार्य डॉ. अमित सिंह के विजन को दिया है। उनकी आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के प्रति रुचि और निरंतर प्रयासों के कारण ही कॉलेज को यह अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक मशीन प्राप्त हो सकी है। उनका मुख्य उद्देश्य रहा है कि चंदौली और आसपास के क्षेत्रों के गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों को वाराणसी या लखनऊ जैसे बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े। इससे मरीजों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है।
लगातार बढ़ रही हैं आधुनिक सुविधाएं
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 से अब तक इस संस्थान में दूरबीन विधि द्वारा पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) और अपेंडिक्स की लगभग 60 सफल सर्जरी की जा चुकी हैं। लेकिन हर्निया के क्षेत्र में यह पहली बड़ी सफलता है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों की टीम और कॉलेज प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य भविष्य में और भी जटिल ऑपरेशन और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि चंदौली स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में एक मॉडल जिला बनकर उभरे।