चंदौली मेडिकल कॉलेज में जलभराव का संकट: डेढ़ करोड़ का ड्रेनेज प्रस्ताव नामंजूर, इस बार भी बारिश में डूबेगा पूरा परिसर

 

चंदौली मेडिकल कॉलेज को जलभराव से बचाने के लिए भेजा गया 1.50 करोड़ का प्रस्ताव शासन ने नामंजूर कर दिया है। 400 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी जल निकासी का पुख्ता इंतजाम न होने से इस बार भी बारिश में परिसर डूबने की आशंका है।

 
 

डेढ़ करोड़ रुपये का जल निकासी प्रस्ताव नामंजूर

इस बार भी बारिश में डूबेगा मेडिकल कॉलेज

400 करोड़ रुपये खर्च होने पर भी अव्यवस्था

निर्माण एजेंसी की लापरवाही से मरीज परेशान

पानी निकालने के लिए कॉलेज प्रशासन के दो पंप

चंदौली जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इस बार मॉनसून की बारिश में बाबा कीनाराम जिला मेडिकल कॉलेज परिसर एक बार फिर पानी-पानी होने वाला है। कॉलेज को जलभराव की इस पुरानी और गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए जो ड्रेनेज सिस्टम का प्लान बनाया गया था, उसे तगड़ा झटका लगा है। प्रशासन की ओर से भेजा गया डेढ़ करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव शासन स्तर से मंजूर नहीं हो पाया है।

400 करोड़ खर्च, पर इंतजाम जीरो
हैरानी की बात यह है कि इस भव्य मेडिकल कॉलेज भवन को तैयार करने में करीब 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा चुकी है। इतने बड़े बजट के बाद भी कॉलेज परिसर में जल निकासी का कोई सही परमानेंट इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा यह है कि आम दिनों में भी यहाँ गंदगी का अंबार लगा रहता है और अब बारिश के मौसम में स्थिति और ज्यादा बदतर होने की पूरी आशंका बनी हुई है।

फाइलों में अटका प्रोजेक्ट, दावे हुए फेल
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमित सिंह ने बताया कि दो-तीन साल पहले जब भारी बारिश हुई थी, तब पूरा अस्पताल परिसर टापू बन गया था। उस दौरान यहाँ आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उस घटना से सबक लेते हुए अस्पताल परिसर से जल निकासी के लिए एक डेढ़ करोड़ (1.50 करोड़) रुपये का विस्तृत प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। उम्मीद थी कि इस बार बारिश से पहले बजट पास हो जाएगा, लेकिन फाइलों को हरी झंडी नहीं मिल सकी।

निर्माण एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा
अस्पताल में इलाज कराने आ रहे गरीब मरीज अब निर्माण एजेंसी की शुरुआती लापरवाही के कारण परेशान हो रहे हैं। दरअसल, जब निर्माण एजेंसी इस पूरे प्रोजेक्ट का नक्शा तैयार कर रही थी, तब उसने इस बात का जरा भी ख्याल नहीं रखा कि यह इलाका एक डूब क्षेत्र (लो-लैंड) है। कायदे से मेडिकल कॉलेज भवन और परिसर का लेवल पास से गुजरने वाले हाईवे के बराबर या उससे ऊंचा होना चाहिए था। लेकिन परिसर काफी नीचे होने की वजह से बारिश का सारा पानी चारों तरफ से आकर यहीं जमा हो जाता है।

दो पंपों के भरोसे चल रहा काम
फिलहाल ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए दो बड़े पंपों की अलग से व्यवस्था की गई है। बारिश का पानी भरने पर इन पंपों के सहारे पानी को बाहर खींचा जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े परिसर के लिए यह इंतजाम नाकामी छुपाने जैसा है। मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई ने भी पिछले दिनों परिसर का निरीक्षण किया था और कार्यदायी संस्था को नए सिरे से सुधार का प्रस्ताव बनाकर भेजने का निर्देश दिया था।