चंदौली में नम आंखों से याद किए गए करबला के शहीद, मौलाना जाफर बोले- आतंकवाद के खिलाफ खड़े होना ही सच्चा मुहर्रम
चंदौली के अजाखाना-ए-रजा में मुहर्रम की आखिरी मजलिस के साथ ही मजलिसों का दौर थम गया। मौलाना जाफर रिज्वी ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया। शुक्रवार सुबह करबला में ताजिए दफ्न किए जाएंगे। पूरी खबर और तस्वीरें देखने के लिए पढ़ें।
करबला के शहीदों की याद में उठे हाथ
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील
अजाखाना-ए-रज़ा में आखिरी मजलिस संपन्न
सिकंदरपुर और बनारस की अंजुमनों का मातम
बिछिया करबला में दफ्न होंगे ताजिए
चंदौली के अजाखाना-ए-रज़ा में मुहर्रम की आखिरी मजलिस के दौरान हर आंख नम नजर आई। करबला के शहीदों और इमाम हुसैन की याद में अकीदतमंदों के हाथ दुआ के लिए उठे। इस भावुक माहौल में सभी ने देश में अमन-चैन और भाईचारे की कामना की।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जाफ़र रिज़्वी ने एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का संदेश सिर्फ आंसू बहाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मुहर्रम हमें हर तरह के आतंक के खिलाफ खड़े होने की सीख देता है। यजीद के जुल्म को रोकना ही सच्चा इस्लाम है, इसलिए आज हर किसी को मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करना चाहिए।
जैनब की कुर्बानी को किया याद
मौलाना ने सभी धर्मों के बीच आपसी तालमेल और भाईचारे की वकालत की। वहीं, मशहूर शायर वकार सुल्तानपुरी ने अपनी शायरी (नौहे) के जरिए इमाम हुसैन की बहन बीबी जैनब की कुर्बानी की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे करबला की जंग के बाद बीबी जैनब ने हिम्मत दिखाई और यजीद के जुल्म के सामने नहीं झुकीं।
बनारस और सिकंदरपुर की अंजुमनों ने पढ़ा नौहा
इस मौके पर अंजुमन अब्बासिया सिकंदरपुर ने अपने कलाम से करबला के दर्द को बयां किया। इसके साथ ही बनारस से आई मशहूर अंजुमन जाफरिया दोषीपुरा के सदस्यों ने दर्द भरे नौहे और सलाम पढ़कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सिकंदरपुर और स्थानीय अज़ादारों ने छाती पीटकर मातम मनाया।
पैक का स्वागत और प्रशासन का धन्यवाद
अजाखाना-ए-रज़ा के प्रबंधक डॉ. गज़न्फर इमाम ने इस पूरे आयोजन को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया। मजलिस के दौरान इमाम चौक की परिक्रमा करने वाले पैक के जुलूस का स्वागत किया गया और उन्हें शरबत पिलाया गया। स्थानीय अखाड़े के जवानों ने भी लाठी-डंडे और अपने करतब दिखाकर करबला के मंजर को याद किया।
शुक्रवार को करबला में दफ्न होंगे ताजिए
डॉ. गज़न्फर इमाम ने बताया कि मुहर्रम की दसवीं तारीख यानी शुक्रवार की सुबह अजाखाने के पारंपरिक ताजिए और फूलों को पूरी अकीदत के साथ बिछिया स्थित करबला में दफ्न कर दिया जाएगा। इस मौके पर वसीम कादरी, सरवर भाई, अली इमाम, रियाज, नसीम, मोहम्मद रजा, अजय, मोहम्मद इंसाफ, जैगम इमाम, अरशद जाफरी, अकबर अली और समीर उर्फ मुन्ना समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।