फार्मर रजिस्ट्री की बड़ी लापरवाही! चंदौली के 1.87 लाख किसानों की जमीन का रकबा गायब, खाद-बीज के लिए परेशान होंगे किसान

 

चंदौली में फार्मर रजिस्ट्री में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिले के 1.87 लाख किसानों की जमीन का पूरा ब्योरा दर्ज न होने से उन्हें खरीफ सीजन में खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है और वे दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

 
 

चंदौली के 2.57 लाख किसान प्रभावित

1.87 लाख रजिस्ट्रियों में भारी त्रुटि

खाद और बीज के लिए भटके किसान

लेखपाल और तहसील के काट रहे चक्कर

कृषि योजनाओं का लाभ मिलना हुआ मुश्किल

चंदौली जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के सामने एक बहुत बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है। सरकार की ओर से अनिवार्य की गई फार्मर रजिस्ट्री की कमियां अब अन्नदाताओं पर भारी पड़ रही हैं। जिले में कुल 2.57 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होनी तय की गई थी, जिसमें से अब तक 2.34 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा भी किया जा चुका है।

लेकिन सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 80 प्रतिशत यानी 1.87 लाख किसानों की रजिस्ट्री में उनकी कृषि भूमि का पूरा विवरण दर्ज ही नहीं हो पाया है। किसी के फॉर्म में गाटा संख्या छूट गई है, तो किसी की पूरी जोत का रकबा अपडेट नहीं हुआ है।

खाद केंद्रों से खाली हाथ लौट रहे किसान

कृषि विभाग ने उर्वरक (खाद) वितरण के लिए फार्मर रजिस्ट्री को पूरी तरह जरूरी कर दिया है। ऐसे में जिन किसानों के कागजात अधूरे हैं, उन्हें उपलब्ध भूमि के अनुसार ही खाद देने की बात कही जा रही है। इसके कारण कई किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है और उन्हें सहकारी केंद्रों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अब किसान अपनी समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत भवन, जन सेवा केंद्र (CSC), लेखपाल और तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

शिविरों में खानापूर्ति और अधूरे सत्यापन ने बिगाड़ा खेल

दरअसल, शासन के निर्देश पर गांवों में विशेष शिविर लगाकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तो बना दी गई, लेकिन उस समय जमीन का सही तरीके से भू-सत्यापन नहीं किया गया। कई किसानों की पैतृक जमीन, आपसी बंटवारे के बाद की भूमि अथवा हाल ही में खरीदी गई नई जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज ही नहीं किया गया। इस गंभीर लापरवाही का सीधा असर अब खाद-बीज वितरण और कृषि विभाग की अन्य योजनाओं पर साफ़ दिखाई दे रहा है।

अन्नदाताओं का छलका दर्द, खेती का काम ठप

इस अव्यवस्था को लेकर क्षेत्र के किसानों का गुस्सा और दर्द साफ देखा जा सकता है। किसान रजवंत सिंह यादव ने बताया कि रजिस्ट्री में उनकी आधी ही जमीन दर्ज है, जिसके कारण उन्हें बिना खाद लिए ही वापस लौटना पड़ा। वहीं अरविंद मिश्रा ने कहा कि वे तीन बार जन सेवा केंद्र और तहसील जा चुके हैं, पर काम नहीं हुआ।

किसान विजय शंकर मिश्र और विजय शंकर सिंह बाबिल ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि धान की रोपाई के समय खाद सबसे ज्यादा जरूरी है, लेकिन गाटा संख्या छूटने और कागजात में सुधार न होने से वे रोजाना भटक रहे हैं।

भविष्य की सभी सरकारी योजनाओं का आधार बनेगी रजिस्ट्री

इस पूरे मामले पर उप कृषि निदेशक भीमसेन ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में कोई भी कमी रह गई है, वे संबंधित लेखपाल, तहसील, ग्राम पंचायत भवन या जन सेवा केंद्र के माध्यम से उसमें तुरंत संशोधन करा सकते हैं। विभाग लगातार इन कमियों को सुधारने का काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद और खाद वितरण जैसी तमाम महत्वपूर्ण योजनाएं इसी फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही संचालित की जाएंगी।