पत्रकार कॉलोनी के लोगों का फूटा गुस्सा, 8 साल से सड़क अधूरी तो अब खुद ही उठा लिया फावड़ा..होगा वोट का बहिष्कार
चन्दौली नगर पंचायत के वार्ड नंबर 2 में विकास की अनदेखी पर जनता का धैर्य जवाब दे गया। 8 साल से 60 मीटर की अधूरी सड़क से परेशान पत्रकार कॉलोनी के निवासियों ने अब खुद श्रमदान कर मार्ग बनाना शुरू कर दिया है।
8 वर्षों से अधूरी पड़ी 60 मीटर की सड़क
चेयरमैन और वार्ड सदस्य पर अनदेखी का आरोप
चुनाव के समय वोट मांगने वालों का विरोध
आपसी सहयोग और श्रमदान से सड़क निर्माण शुरू
चंदौली जिले में डिजिटल इंडिया और विकास के दावों के बीच नगर पंचायत चन्दौली के वार्ड नंबर 2 से एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ की पत्रकार कॉलोनी (पूर्वांचल कंप्यूटर वाली गली) में रहने वाले लोग पिछले 8 वर्षों से महज 60 मीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए सरकारी दफ्तरों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं। लगातार हो रही अनदेखी से तंग आकर अब कॉलोनीवासियों ने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया है।
चेयरमैन और सभासद पर पक्षपात का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने नगर पंचायत चेयरमैन सुनील कुमार यादव और संबंधित वार्ड सदस्य से कई बार लिखित और मौखिक गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन अन्य इलाकों में तो तेजी से विकास कार्य करा रहा है, लेकिन इस कॉलोनी के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में जातीय आधार पर प्राथमिकता देते हुए नापी कराई गई, जबकि उनकी जायज मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
नरक बनी जिंदगी: बारिश में घरों में कैद होने की मजबूरी
इस अधूरी सड़क के कारण बरसात के मौसम में हालात बदतर हो जाते हैं। कीचड़ और जलभराव के चलते स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस तक अंदर नहीं आ पाती। सालों के इंतजार के बाद जब प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो लोगों ने आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान के जरिए सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया।
जनप्रतिनिधियों को चेतावनी: 'काम नहीं तो वोट नहीं'
विकास की बाट जोह रहे इन नागरिकों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। निवासियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले नेताओं का कॉलोनी में स्वागत नहीं किया जाएगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, जो नेता उनके सुख-दुख और मूलभूत समस्याओं के समाधान में साथ नहीं खड़ा हो सकता, उसे समर्थन देने का कोई औचित्य नहीं है। वर्तमान में यह मामला पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है।