चंदौली में मिशन शक्ति का जोरदार आगाज : एंटीरोमियो टीम ने चौपाल लगाकर महिलाओं को दी जानकारी

चंदौली में पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर मिशन शक्ति अभियान (फेज 5.0) के तहत महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा हेतु व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए गए। एंटीरोमियो टीमों ने स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगाकर महिलाओं और बालिकाओं को कानूनी अधिकारों, जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम, और सरकारी योजनाओं, जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, के बारे में जागरूक किया। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सशक्त वातावरण प्रदान करना है।
 

महिला सुरक्षा, सम्मान हेतु जागरूकता चौपाल आयोजित

चंदौली पुलिस ने विभिन्न थानों में मिशन शक्ति की चौपाल

दी सरकारी योजनाओं और महिला कानूनों की जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार की मंशानुसार, चंदौली जिले के पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देशन में पूरे जनपद में कम्युनिटी पुलिसिंग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'मिशन शक्ति' विशेष अभियान (फेज-5.0) का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के तहत, महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्कूलों और गाँवों में जागरूकता चौपाल

अभियान के अंतर्गत, जनपद के विभिन्न थानों जैसे बलुआ, शहाबगंज, सकलडीहा, नौगढ़, इलिया और चकरघट्टा की एंटीरोमियो टीमों ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीमों ने बाबा फलाहारी इंटर कॉलेज, सेनानी बालिका इंटर कॉलेज, और वृंदावन, अमृतपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर चौपालों का आयोजन किया। इन चौपालों का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक करना और उनकी महिला संबंधित समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करना रहा।

कानूनी प्रावधानों और योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान, पुलिस टीमों ने महिलाओं और बालिकाओं को उनके संरक्षण हेतु बनाए गए प्रमुख कानूनों के बारे में विस्तार से बताया। इनमें घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, दहेज निषेध अधिनियम, 1961, और कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 शामिल थे।

इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेन्टर, 181 महिला हेल्पलाइन, और शक्ति सदन व सखी निवास जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। साथ ही, नवस्थापित मिशन शक्ति केन्द्र के कार्य और उद्देश्य के संबंध में भी आमजन को अवगत कराया गया, ताकि महिलाएं और बालिकाएं एक सशक्त और सुरक्षित वातावरण महसूस कर सकें।