भारतीय कुश्ती महासंघ को जमीन देने के लिए 3 लोग तैयार, कौन बनता है संजय सिंह की पहली पसंद ..?
चंदौली कॉन्क्लेव 2026 में WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने 7 दिनों में कुश्ती केंद्र शुरू करने का वादा किया, जिसके जवाब में डॉ. विनय प्रकाश तिवारी समेत तीन लोगों ने जमीन देने का ऐलान कर दिया है। अब देखना है कि यह वादा धरातल पर कब उतरता है।
WFI अध्यक्ष की 7 दिन वाली बड़ी चुनौती
डॉ. विनय तिवारी ने दी 14 बिस्वा जमीन
ब्लॉक प्रमुखों ने भी की जमीन की पेशकश
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मंचीय वादा
पूर्वांचल के पहलवानों को जगी नई उम्मीद
चंदौली जनपद में आयोजित 'चंदौली कॉन्क्लेव 2026' न केवल विकास की चर्चाओं का केंद्र बना, बल्कि यह खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होता दिख रहा है। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह 'बबलू' द्वारा मंच से किए गए एक दावे ने जिले की राजनीति और खेल गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। संजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि यदि उन्हें 6 से 8 बिस्वा जमीन उपलब्ध करा दी जाए, तो वह मात्र 7 दिनों के भीतर वहां UWW (यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग) मानक के कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कार्य शुरू करवा देंगे।
जमीन दाताओं के बीच लगी होड़
संजय सिंह के इस बयान के तुरंत बाद, मंच पर मौजूद और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने जमीन देने की पेशकश की झड़ी लगा दी। सबसे पहले 'डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल' (कांटा बिशुनपुरा) के प्रबंधक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने दरियादिली दिखाते हुए कहा कि वह स्कूल के पास ही अपनी 14 बिस्वा जमीन कुश्ती महासंघ के नाम करने को तैयार हैं। यह मांग से लगभग दोगुनी जमीन है। उनके अलावा, महेंद्र टेक्निकल इंटर कॉलेज के प्रबंधक व सदर ब्लॉक प्रमुख संजय सिंह और धानापुर ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में कुश्ती अखाड़े के लिए जमीन देने की सार्वजनिक घोषणा की है।
साख का सवाल: क्या 7 दिन में शुरू होगा काम?
अब सवाल केवल जमीन की उपलब्धता का नहीं, बल्कि वादे की साख का रह गया है। जब तीन-तीन बड़े पक्ष जमीन देने के लिए तैयार खड़े हैं, तो जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या WFI अध्यक्ष अपने '7 दिन' के अल्टीमेटम पर खरे उतरेंगे? स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह वादा हकीकत में बदलता है, तो यह चंदौली ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के उभरते पहलवानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ घटनाक्रम
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नेटिजन्स इसे एक 'पब्लिक चैलेंज' की तरह देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब दानदाता अगले ही दिन कागजी कार्रवाई के लिए तैयार हैं, तो अब महासंघ की ओर से देरी का कोई बहाना नहीं होना चाहिए। अब सबकी निगाहें अगले एक हफ्ते पर टिकी हैं—क्या सच में पहलवानों के सपनों का अखाड़ा बनेगा या यह महज एक जज्बाती चुनावी भाषण बनकर रह जाएगा?