DM के लेटर पर सरकार नहीं दे रही जवाब,  75 करोड़ की अल्ट्रा मॉडल मत्स्य मंडी पर लटका ताला, जानें क्यों 9 महीनों से नहीं हो सका दुकानों का आवंटन

 

चंदौली में 75 करोड़ रुपये की लागत से बनी देश की सबसे बड़ी 'स्टेट ऑफ आर्ट' होलसेल फिश मार्केट उद्घाटन के 9 महीने बाद भी बंद पड़ी है। मंडी समिति द्वारा मनमाना किराया तय करने से दुकानों का आवंटन अटक गया है।

 
 

75 करोड़ की मत्स्य मंडी बंद

दुकानों के किराए पर फंसा पेंच

उद्घाटन को बीते नौ महीने शेष

1500 से अधिक रोजगार पर संकट

शासन से मांगी गई नई गाइडलाइन

चंदौली जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले में मत्स्य पालकों (मछली पालने वाले किसानों) की किस्मत बदलने के लिए देश की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक 'स्टेट ऑफ आर्ट' होलसेल फिश मार्केट का निर्माण कराया गया था। इस भव्य मंडी को बनाने में पूरे 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

अक्टूबर 2025 में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका भव्य तरीके से लोकार्पण भी किया था। लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि उद्घाटन के बाद धीरे-धीरे 9 महीने का लंबा वक्त बीत चुका है, मगर इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की अल्ट्रा मॉडल मत्स्य मंडी में आज भी ताला लटका हुआ है।

किराए के चक्कर में फंसा पेंच, मंडी समिति ने तय की मनमानी दरें
करोड़ों की इस योजना के ठप होने के पीछे सबसे बड़ी वजह दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया का अटकना है। इस सर्वसुविधायुक्त मत्स्य मंडी के अंदर कुल 110 से अधिक हाईटेक दुकानें बनाई गई हैं, जिन्हें स्थानीय मछली विक्रेताओं और किसानों को आवंटित किया जाना था।

लेकिन पेंच तब फंस गया जब मंडी समिति ने अपनी तरफ से इन दुकानों का किराया बेहद मनमाने और ऊंचे दामों पर तय कर दिया। इस मनमानी दर के कारण आम मछुआरों और व्यापारियों के लिए दुकानें लेना नामुमकिन हो गया, जिससे पूरी आवंटन प्रक्रिया ठप होकर रह गई है।

1500 से अधिक लोगों के रोजगार और आमदनी पर लगा ब्रेक
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने बताया कि यह मंडी न केवल भारत बल्कि एशिया की सबसे बड़ी और आधुनिक मछली मंडियों में से एक है। इसके पूरी तरह चालू होने से पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के मत्स्य पालकों की आमदनी दोगुनी से भी अधिक होने का बड़ा दावा किया गया था।

इसके साथ ही, इस परियोजना से लगभग 1500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थायी रोजगार मिलना तय हुआ था। मछली से जुड़े तमाम कारोबार को एक ही छत के नीचे लाने के लिए यहाँ फिश रेस्टोरेंट, ट्रेनिंग सेंटर, आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल और स्पेशल प्रोसेसिंग यूनिट जैसी शानदार सुविधाएं बनाई गई हैं, जो अभी धूल फांक रही हैं।

मंडी समिति ने अभी तक नहीं लगवाए जरूरी उपकरण और एसी
इस बड़ी मंडी को तैयार करने के लिए मत्स्य विभाग ने 61.87 करोड़ रुपये और मंडी समिति ने ₹10 करोड़ का भारी-भरकम बजट जारी किया था। बजट पूरा खर्च होने के बावजूद मंडी समिति की ओर से एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है।

मंडी में मछली को सुरक्षित और ताजा रखने के लिए जिन आधुनिक उपकरणों, एयर कंडीशनर (एसी) और अन्य संसाधनों को लगाया जाना था, उन्हें मंडी समिति ने अभी तक स्थापित ही नहीं कराया है। बिना जरूरी उपकरणों के दुकानों का संचालन करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

जिलाधिकारी ने शासन को तीन बार लिखा पत्र
मत्स्य निदेशक रामलाल निषाद के मुताबिक, स्थानीय प्रशासन इस गतिरोध को दूर करने का लगातार प्रयास कर रहा है। चंदौली के जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

जिलाधिकारी की ओर से अब तक तीन बार उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजा जा चुका है, जिसमें दुकानों के आवंटन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और नई न्यायसंगत गाइडलाइन मांगी गई है। जिले के हजारों किसानों और व्यापारियों को अब केवल शासन के आदेश का इंतजार है, ताकि उचित दरों पर दुकानों का आवंटन हो सके और 75 करोड़ की इस ऐतिहासिक मंडी का ताला खुल सके।