बोधगया से सारनाथ जा रही 'विश्व शांति पदयात्रा' पहुंची चंदौली; भंतेगणों ने दिया करुणा और मानवता का संदेश

 

बोधगया से सारनाथ तक निकाली जा रही 250 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक 'विश्व शांति पदयात्रा' का चंदौली पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। बौद्ध भिक्षुओं ने नगर भ्रमण कर लोगों को भगवान बुद्ध के शांति, प्रेम और अहिंसा के विचारों से प्रेरित किया।

 
 

बोधगया से सारनाथ जा रही पदयात्रा

चंदौली में भंतेगणों का भव्य स्वागत

नगर भ्रमण कर दिया शांति संदेश

250 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक यात्रा

बुद्ध के विचारों को अपनाने का संकल्प

विश्व शांति और मानव कल्याण के पावन उद्देश्य को लेकर बोधगया से सारनाथ तक निकाली जा रही ऐतिहासिक “विश्व शांति पदयात्रा” का चंदौली जनपद में आगमन हुआ। जिले की सीमा में प्रवेश करते ही भंतेगणों और देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों का स्थानीय नगरवासियों ने बेहद हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ भव्य स्वागत किया। इस दौरान माल्यार्पण और पुष्पवर्षा के माध्यम से भिक्षुओं का अभिनंदन किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण आध्यात्मिक और शांतिमय हो उठा।

नगर भ्रमण के साथ गूंजे बुद्ध के संदेश
स्वागत समारोह के पश्चात भंतेगणों के नेतृत्व में चंदौली नगर में भव्य भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सड़कों के दोनों ओर खड़े सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने हाथ जोड़कर बौद्ध भिक्षुओं का अभिवादन किया। नगर भ्रमण करते हुए भंतेगणों ने जन-जन तक भगवान गौतम बुद्ध के प्रेम, करुणा, अहिंसा और आपसी सद्भावना के संदेशों को पहुंचाया। स्थानीय लोगों ने भी इन उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का दृढ़ संकल्प लिया।

वैश्विक शांति के लिए बुद्ध के विचार प्रासंगिक
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए भंतेगणों ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व के भीतर बढ़ती हिंसा, वैमनस्य और अशांति को समाप्त करने के लिए भगवान बुद्ध के विचार सबसे अधिक प्रासंगिक हैं। आज के युग में समाज को आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और शुद्ध मानवता के मार्ग पर चलने की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे सत्य और नैतिकता के मार्ग पर आगे बढ़ें ताकि समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित किया जा सके।

250 किलोमीटर की यात्रा का उद्देश्य
यह ऐतिहासिक विश्व शांति पदयात्रा बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र बोधगया से शुरू होकर सारनाथ तक लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस लंबी यात्रा में भारत सहित विभिन्न देशों के अनेक भिक्षु-भिक्षुणी और बौद्ध अनुयायी पूरी श्रद्धा के साथ सम्मिलित हैं। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जाकर आम जनता को मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और बौद्ध धम्म के वास्तविक महत्व के प्रति जागरूक करना है। चंदौली के नागरिकों ने इस आगमन को जिले के लिए एक बड़ा सौभाग्य बताया।