CMO ऑफिस में मलाईदार सीटों का मोह: तबादले के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं चार बाबू

 

चंदौली मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में तैनात चार बाबुओं का दूसरे जिलों में तबादला होने के बावजूद कुर्सी न छोड़ने का मामला गरमा गया है। नए बाबुओं के आने के बाद भी पुराने बाबू जुगाड़ लगाने में जुटे हैं।

 
 

चंदौली सीएमओ ऑफिस में बाबुओं का तबादला

मलाईदार पदों को छोड़ने में हो रही आनाकानी

स्थानांतरित चार बाबू नहीं हुए अब तक रिलीव

नए बाबू पहुंचे, पुराने लगा रहे हैं जुगाड़

 चंदौली जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक अनोखा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। शासन द्वारा लिपिकीय कर्मचारियों (बाबुओं) के स्थानांतरण का आदेश जारी किए जाने के बाद भी कुछ बाबू अपनी 'मलाईदार' और प्रभावशाली सीटों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। स्थानांतरण के कई दिन बीत जाने के बाद भी इन बाबुओं के कार्यमुक्त (रिलीव) न होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग में तरह-तरह की कानाफूसी शुरू हो गई है।

चार बाबुओं का हुआ तबादला, नए बाबू भी पहुंचे चंदौली
जानकारी के अनुसार, शासन स्तर से हाल ही में सीएमओ कार्यालय में लंबे समय से जमे चार प्रमुख बाबुओं का तबादला दूसरे जनपदों में कर दिया गया है। स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों में नीरज बाबू, अरुण बाबू, प्रमोद कुमार मिश्रा और विमल कांत शामिल हैं। शासन ने इन चारों की जगह पर नए बाबुओं की तैनाती भी चंदौली में कर दी है, और नए कर्मचारी अपना कार्यभार संभालने के लिए जिले में अपनी आमद भी दर्ज करा चुके हैं। इसके बावजूद पुराने बाबुओं का अपनी कुर्सियों से मोहभंग नहीं हो पा रहा है।

मलाईदार पदों का मोह और पर्दे के पीछे का जुगाड़
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो जिन पदों पर ये चारों बाबू कार्यरत हैं, उन्हें विभाग के सबसे महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और 'मालदार' पदों में गिना जाता है। यही कारण है कि ये कर्मचारी अपनी वर्तमान तैनाती को छोड़ने के बजाय यहीं टिके रहने के लिए विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक स्तरों पर गोटियां फिट करने में जुटे हैं। विभाग में चर्चा यह भी है कि इसी पर्दे के पीछे चल रहे जोड़-तोड़ के प्रयास के कारण ही रिलीविंग की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।

जून के वेतन पर फंसा पेंच, समय से जाना अनिवार्य
गौरतलब है कि शासन की ओर से जारी स्थानांतरण नीति के आदेश में साफ तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि जून महीने का वेतन संबंधित कर्मचारी को उसी जिले से दिया जाएगा, जहां वह नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करेगा। ऐसे में यदि ये बाबू समय से कार्यमुक्त होकर अपने नए तैनाती स्थल पर योगदान नहीं देते हैं, तो तकनीकी रूप से इनका इस महीने का वेतन भी फंस सकता है। इस कड़े नियम के बावजूद बाबुओं का दफ्तर में जमे रहना हर किसी को हैरान कर रहा है।

सीएमओ डॉ. पारितोष मिश्रा की दो टूक: हर हाल में होना होगा कार्यमुक्त
इस पूरे मामले पर जब चंदौली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. पारितोष मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। सीएमओ ने बताया कि जिन कर्मचारियों का स्थानांतरण हुआ है, उनके स्थान पर नए बाबू आ चुके हैं और कुछ अन्य के आने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि शासन के निर्देशों का अक्षरसः (पूरी तरह) पालन कराया जाएगा। जिसका जहां ट्रांसफर हुआ है, उसे वहां जाना ही होगा। रिलीविंग की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।