तपोवन विद्यालय में फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम, छात्रों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

चंदौली के तपोवन विद्यालय में कृषि विज्ञान केंद्र ने फसल अवशेष प्रबंधन पर छात्रों को जागरूक किया। 125 से अधिक छात्रों ने भाग लिया और जाना कि पराली जलाने से प्रदूषण होता है, जबकि खेत में मिलाने से मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
 

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूकता कार्यक्रम


कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के शानदार पहल


पराली जलाने से मृदा को होता है नुकसान


फसल अवशेषों से बढ़ती खेतों की उर्वरा शक्ति


निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली ने किसानों और आम जनता के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में, 11 दिसंबर 2025 को तपोवन विद्यालय, चंदौली में स्कूल स्तरीय विद्यार्थी जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 125 से अधिक छात्र एवं छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व को समझा।

पराली जलाने से नुकसान और समाधान
यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मृदा वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने छात्रों को विस्तार से बताया कि किसान अक्सर फसल अवशेषों, विशेष रूप से धान की पराली, में आग लगा देते हैं। इस कृत्य से न केवल गंभीर पर्यावरण प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी के बहुमूल्य पोषक तत्वों का भारी नुकसान भी होता है।

डॉ. चंदन सिंह ने छात्र-छात्राओं को जागरूक करते हुए एक सरल और प्रभावी समाधान बताया। उन्होंने कहा कि पराली को खेत में जलाने के बजाय उसे खेत में ही मिला देने से मृदा की उर्वरा शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने उल्लेख किया कि खेतों के अंदर जीवांश (Organic Matter) की मात्रा कम होने के कारण आज सब्जियों एवं फलों के स्वाद और गुणवत्ता में कमी आ रही है। फसल अवशेषों को खाद के रूप में मिट्टी में मिलाने से इस गुणवत्ता को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकता है।

गोबर की खाद का महत्व और अपील
इस अवसर पर उपस्थित डॉ. अभय दीप गौतम ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति और जल धारण क्षमता को बढ़ाने में पशुओं के गोबर की खाद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैविक खाद का प्रयोग मिट्टी को स्वस्थ रखता है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करता है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों और कृषि वैज्ञानिकों ने छात्रों से यह अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण जानकारी को केवल कक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि अपने अभिभावकों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी अवश्य दें और उन्हें पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन
जागरूकता कार्यक्रम के तहत, कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दिनांक 10 दिसंबर 2025 को अवशेष प्रबंधन पर आधारित एक निबंध प्रतियोगिता और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। इन प्रतियोगिताओं में छात्रों ने अपनी रचनात्मकता और जागरूकता का शानदार प्रदर्शन किया।

निबंध प्रतियोगिता के विजेता:

प्रथम स्थान: सुकृति जायसवाल (कक्षा 10)

द्वितीय स्थान: आर्यन गुप्ता (कक्षा 9)

तृतीय स्थान: अछोभय सिंह (कक्षा 10)

पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेता:

प्रथम स्थान: चंद्रप्रभा तिवारी (कक्षा 8)

द्वितीय स्थान: तनु सिंह (कक्षा 10)

तृतीय स्थान: आराध्या सिंह