डैडीज इंटरनेशनल स्कूल का फैसला: 25 मई से गर्मी की छुट्टियों में भी जारी रहेंगी ऑनलाइन क्लासेज, अब दादी-नानी के घर से भी पढ़ेंगे बच्चे

 

चंदौली के डैडीज इंटरनेशनल स्कूल ने गर्मी की छुट्टियों में पढ़ाई जारी रखने के लिए अनोखा प्रयोग किया है। 25 मई से 12 जून तक ऐप के माध्यम से कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्रों के लिए रोजाना दो घंटे ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी।

 
 

डैडीज इंटरनेशनल स्कूल का अनूठा प्रयोग 

गर्मी की छुट्टियों में ऑनलाइन क्लासेज 

नए छात्रों को भी मिलेगा लाभ 

डिजिटल तकनीक से जुड़ेंगे ग्रामीण बच्चे

डैडीज इंटरनेशनल स्कूल का अनूठा प्रयोग 

गर्मी की छुट्टियों में ऑनलाइन क्लासेज 

नए छात्रों को भी मिलेगा लाभ 

डिजिटल तकनीक से जुड़ेंगे ग्रामीण बच्चे

 चंदौली जनपद में आधुनिक शिक्षा और तकनीक के समन्वय की एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान 'डैडीज इंटरनेशनल स्कूल' ने ग्रीष्मकालीन अवकाश (गर्मी की छुट्टियों) के दौरान भी विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और उनकी निरंतरता को बनाए रखने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा आगामी 25 मई से लेकर 12 जून तक कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए नियमित रूप से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी। स्कूल प्रशासन की इस अभिनव सोच के कारण अब बच्चे छुट्टियों का आनंद लेने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई से भी जुड़े रह सकेंगे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कहीं से भी जुड़ सकेंगे छात्र
विद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह विशेष ऑनलाइन कक्षाएं सोमवार से लेकर शुक्रवार तक प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक (दो घंटे) संचालित की जाएंगी। छात्र अपने मोबाइल, लैपटॉप या डेस्कटॉप कंप्यूटर के जरिए विद्यालय के विशेष 'Android App' की मदद से देश या दुनिया के किसी भी कोने से बेहद आसानी से इस लाइव क्लास का हिस्सा बन सकेंगे। विद्यालय प्रबंधन ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि मई और जून के इस चालू महीने में जिन नए विद्यार्थियों का स्कूल में दाखिला (एडमिशन) होगा, उन्हें भी इन ऑनलाइन कक्षाओं से जोड़ा जाएगा। इससे नए छात्र नया शैक्षणिक सत्र पूरी तरह शुरू होने से पहले ही स्कूल की शिक्षण प्रणाली और अपने पाठ्यक्रम से भली-भांति परिचित हो सकेंगे।

चारदीवारी से बाहर निकली शिक्षा: संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
इस डिजिटल प्रयोग को लेकर विद्यालय के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि समकालीन दौर में शिक्षा को महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर सीमित रखना उचित नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि गर्मी की लंबी छुट्टियों के कारण बच्चों का पढ़ाई का प्रवाह पूरी तरह टूट जाता है। इसी अंतराल को पाटने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने आगे कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि बच्चा चाहे अपनी दादी के घर हो, नानी के घर हो या परिवार के साथ कहीं सैर-सपाटे पर गया हो, वह रोजाना मात्र दो घंटे अपनी पढ़ाई को जरूर दे। इससे उनके सीखने का क्रम टूटने नहीं पाएगा।" डॉ. तिवारी ने डिजिटल एजुकेशन की वकालत करते हुए कहा कि तकनीक आज ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी वैश्विक स्तर की शिक्षा से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुकी है।

नियमितता और अनुशासन की आदत: प्रधानाचार्य डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस मुहिम का लक्ष्य सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में समय के सदुपयोग और नियमित अध्ययन की आदत विकसित करना है। छुट्टियां आराम के लिए आवश्यक हैं, लेकिन किताबों से पूरी तरह दूरी बनाना बच्चों के भविष्य के लिहाज से ठीक नहीं है। यदि विद्यार्थी प्रतिदिन थोड़ा समय भी पढ़ाई को देंगे, तो वे छुट्टियों के बाद एक बेहतर मानसिक तैयारी और आत्मविश्वास के साथ दोबारा स्कूल लौटेंगे।

अभिभावकों ने फैसले का किया स्वागत
विद्यालय की इस आधुनिक और दूरदर्शी सोच को लेकर स्थानीय अभिभावकों में भी भारी उत्साह है। परिजनों का कहना है कि बच्चे आमतौर पर छुट्टियों में मोबाइल और स्क्रीन पर गेम खेलकर या वीडियो देखकर समय गंवाते हैं, लेकिन अब उसी मोबाइल का उपयोग रचनात्मक और शैक्षणिक कार्यों के लिए होगा। अभिभावकों ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अब उनके बच्चे गांव या रिश्तेदारों के घर रहकर भी अपनी पढ़ाई का नुकसान होने से बचा सकेंगे। चंदौली जिले में इसे शिक्षा के क्षेत्र का एक अभूतपूर्व प्रयोग माना जा रहा है।