PWD के साहब को पता नहीं, जिले की कौन सी सड़क खराब है, एक दर्जन गांवों की किस्मत में सिर्फ गड्ढे

चंदौली के बरहनी ब्लॉक के एक दर्जन गांवों के लोग जर्जर और खटारा सड़कों से नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सब अनजान बने बैठे हैं। जानिए किन गांवों के रास्तों का है बुरा हाल।

 

बरहनी ब्लॉक में एक दर्जन सड़कें जर्जर

जगह-जगह गड्ढों और जलभराव से मुसीबत

मरीजों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने फेरा मुंह

अधिशासी अभियंता ने दिए जांच के निर्देश

चंदौली जिले के बरहनी विकासखंड क्षेत्र से विकास के दावों की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के लगभग एक दर्जन गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग और लिंक रोड लंबे समय से खटारा पड़े हैं। सड़कों की गिट्टियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और रास्तों में सिर्फ गहरे गड्ढे नजर आते हैं। इस बदहाली के कारण इलाके के हजारों ग्रामीणों का घर से निकलना और आवागमन करना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं रह गया है।

इन 9 प्रमुख सड़कों पर चलना बन चुका है मौत का सफर

इलाके के ग्रामीण सूर्यजीत कुमार, चंद्रिका राम, राधेश्याम उपाध्याय और संजय सिंह ने बताया कि क्षेत्र की कई मुख्य सड़कें सालों से बदहाल हैं। इनमें बहोरा से सलेमपुर जाने वाली 3 किलोमीटर सड़क, बहोरा रेलवे स्टेशन से कुशहा गांव जाने वाली 3.5 किलोमीटर सड़क, और बहोरा रेलवे स्टेशन से नूरी गांव को जोड़ने वाली 2 किलोमीटर सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।

इसके अलावा कम्हारी से रहपुरी गांव जाने वाला लगभग 600 मीटर का रास्ता, सितलपुरा से बरहन की 2 किलोमीटर सड़क, बरहन से लखईपुर जाने वाली 3 किलोमीटर सड़क, रैथा से गोपालपुर होते हुए धीना जाने वाला 5 किलोमीटर का मार्ग, रैथा से सिरकलपुर होते हुए धीना जाने वाली 3 किलोमीटर सड़क, और भैसऊर से चिलहारी जाने वाली 3 किलोमीटर सड़क सालों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

नेता जी करते हैं परहेज, बरसात में और बिगड़ते हैं हालात

स्थानीय लोगों का कहना है कि बदहाल रास्तों के कारण सत्ता पक्ष के विधायक और नेता जी भी अब इन गांवों में आने से कतराने लगे हैं। बरसात के दिनों में तो स्थिति और ज्यादा जानलेवा हो जाती है। सड़कों के गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे यह पता ही नहीं चलता कि सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क। इस वजह से राहगीर और मोटरसाइकिल सवार आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

बीमारों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों पर आफत

इस खटारा सड़क का सबसे बुरा असर स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का दर्द है कि अगर गांव में कोई अचानक बीमार हो जाए, तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक समय पर नहीं आ पाती। बच्चों को स्कूल भेजने में माता-पिता को हमेशा अनहोनी का डर सताता रहता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर मानसून के इस मौसम में समय रहते इन सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।

साहब बोले- हमें तो पता ही नहीं था, अब कराएंगे जांच

हैरानी की बात यह है कि वर्षों से जनता इस दर्द को झेल रही है, लेकिन जब इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) राजेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने साफ कह दिया कि यह पूरा मामला अभी तक उनके संज्ञान में ही नहीं था। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया है कि वे तुरंत संबंधित क्षेत्रीय अभियंताओं को निर्देश देकर इन सभी सड़कों का मौके पर निरीक्षण कराएंगे और इसके बाद जो भी जरूरी और आवश्यक कार्रवाई होगी, उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।