लखनऊ विधानसभा घेराव से पहले चंदौली पुलिस का एक्शन, दिव्यांग जिलाध्यक्ष समेत कई नेता नजरबंद
दिव्यांगों की 24 सूत्रीय मांगों पर संग्राम
लखनऊ विधानसभा घेराव से पहले सख्त कार्रवाई
चंदौली में दिव्यांग संगठन के जिलाध्यक्ष नजरबंद
पुलिस कार्रवाई से दिव्यांगों में भारी नाराजगी
अपने हक और सम्मान के लिए लड़ाई जारी
दिव्यांगों की 24 सूत्रीय मांगों को लेकर 'दिव्यांग महागठबंधन' के बैनर तले सोमवार, 17 अगस्त को लखनऊ में एक बड़ा प्रदर्शन होना था। यह धरना लखनऊ में विधानसभा के सामने हजरतगंज चौराहे पर स्थित गांधी प्रतिमा के पास रखा गया था। लेकिन इस प्रदर्शन से ठीक पहले चंदौली जिले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया, जिससे संगठन के कार्यकर्ताओं और नेताओं में काफी गुस्सा है।
प्रमुख नेताओं को किया गया नजरबंद
संगठन का आरोप है कि प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस ने उन्हें लखनऊ जाने से रोकने की पूरी कोशिश की है। इसी के तहत रविवार को ही जिले के प्रमुख पदाधिकारियों को हिरासत में लिया गया और फिर उनके घरों पर नजरबंद कर दिया गया।
राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी के चंदौली जिलाध्यक्ष गोविंद प्रजापति को पहले सैयदराजा थाना पुलिस ने पकड़ा। बाद में उन्हें छोड़कर सैयदराजा स्थित उनके घर वार्ड नंबर 11 (किदवई नगर) में ही नजरबंद कर दिया गया। इसी तरह दिव्यांग महागठबंधन के जिलाध्यक्ष अभय कुमार चौबे को भी अलीनगर थाना क्षेत्र के पटपरा गांव स्थित उनके घर पर पुलिस ने कैद कर दिया।
पुलिस कार्रवाई पर जताया कड़ा ऐतराज
संगठन के नेताओं का कहना है कि वे अपनी 24 जायज मांगों को लेकर बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से लखनऊ में धरना देने वाले थे। इसके लिए चंदौली जिले से बड़ी संख्या में दिव्यांगों के लखनऊ पहुंचने की तैयारी थी। लेकिन पुलिस ने जिस तरह की कार्रवाई की है, उसका सीधा मकसद नेताओं और कार्यकर्ताओं को लखनऊ जाने से रोकना ही है।
दिव्यांगों की 24 सूत्रीय मांगों पर संग्राम
— Chandauli Samachar (@chandaulinews) August 17, 2026
लखनऊ विधानसभा घेराव से पहले सख्त कार्रवाई
चंदौली में दिव्यांग संगठन के जिलाध्यक्ष नजरबंद
पुलिस कार्रवाई से दिव्यांगों में भारी नाराजगी
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लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप
दिव्यांग संगठनों ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और उनका जल्द समाधान करना चाहिए। पदाधिकारियों ने कहा कि दिव्यांग समाज अपने हक, अधिकार और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा। पुलिस की इस तरह की कार्रवाई को उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।