चंदौली में विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, 15वें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना

 

चंदौली में विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चे का अनिश्चितकालीन धरना 15वें दिन भी जारी रहा। किसान परियोजना को रद्द करने या रोडमैप बदलने की मांग पर अड़े हैं और बड़ी पंचायत की तैयारी कर रहे हैं।

 
 

विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान

विकास भवन पर 15वें दिन धरना

उपजाऊ जमीन न देने का संकल्प

यूपीडा (UPEIDA) से वार्ता की मांग

चंदौली में बड़ी किसान पंचायत की तैयारी

चंदौली जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन के पास विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चे का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 15वें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन में दिन-प्रतिदिन किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। किसान इस एक्सप्रेसवे परियोजना को रद्द करने या फिर इसके रोडमैप में बदलाव करने की मांग को लेकर लगातार हुंकार भर रहे हैं।

'जान दे देंगे, लेकिन उपजाऊ जमीन नहीं देंगे'
संयुक्त किसान मोर्चे के संयोजक और भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि किसान अपनी मांगों पर पूरी तरह डटे हुए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसान बिना सीधी बातचीत के अपनी उपजाऊ जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े। किसान अपने अधिकारों और जमीन को बचाने के लिए आर-पार के मूड में हैं।

चंदौली में बड़ी महापंचायत आयोजित करने की तैयारी
मोर्चे से जुड़े घटक संगठन अब गांव-गांव जाकर किसानों से जनसंपर्क कर रहे हैं और चंदौली में एक बड़ी किसान पंचायत आयोजित करने की रणनीति बना रहे हैं। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को किसानों की चिंताओं से कोई लेना-देना नहीं है। जनता जिन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चुनती है, वे जनप्रतिनिधि ही आज अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं।

यूपीडा (UPEIDA) से वार्ता की मांग और चेतावनी
धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि अब वे अपनी लड़ाई खुद लड़ने को तैयार हैं। सरकार की मनमानी को रोकने के लिए वे खेत की मेड़ पर डटे हैं और कार्यदायी संस्था यूपीडा (UPEIDA) के अधिकारियों से सीधे वार्ता करना चाहते हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि बिना वार्ता के भूमि अधिग्रहण की कोई भी कार्यवाही की गई, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। 

इस दौरान राजीव मौर्या, बिजेंद्र सिंह, गोपाल सिंह, मंगल सिंह, बाबू लाल यादव, विद्याशंकर सिंह, शिवराम तिवारी और संजय सिंह समेत कई किसान उपस्थित रहे।