मछुआरा समाज एकजुट होकर कर रहा है गंगा नदी में मछली पकड़ने के अधिकार की नीलामी का विरोध
मछुआरा समाज ने सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन
राज्यपाल को संबोधित एक पत्रक जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा
नीलामी से हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में
चंदौली जिले में गंगा नदी में मछली पकड़ने के अधिकार की नीलामी के विरोध में मछुआरा समाज एकजुट हो गया है। किसान कांग्रेस और समाजसेवी संगठनों के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर इस अन्यायपूर्ण प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि नीलामी नहीं रुकी, तो वे जल सत्याग्रह करने के लिए मजबूर होंगे।
यह विरोध प्रदर्शन किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रदीप मिश्रा और चहनिया क्षेत्र के समाजसेवी ध्रुव मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। गंगा नदी के किनारे बसे पड़ाव से लेकर टांडा तक के दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
नीलामी से हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में
किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रदीप मिश्रा ने इस मौके पर कहा कि पड़ाव से लेकर टांडा तक के गाँवों में हजारों भूमिहीन मछुआरा परिवार रहते हैं, जिनकी जीविका का एकमात्र साधन माँ गंगा हैं। ये लोग गंगा नदी के आश्रय में रहकर अपना जीवनयापन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चंद लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए गंगा नदी की नीलामी की जा रही है, जो गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे मछुआरा समाज के लोगों के पेट पर लात मारने जैसा है।
प्रदीप मिश्रा ने कहा, "किसान कांग्रेस इस अन्यायपूर्ण नीलामी के खिलाफ है। हमने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर नीलामी को रोकने की मांग की है। अगर हमारी मांग नहीं मानी गई, तो हम हजारों लोगों के साथ जल सत्याग्रह करने के लिए बाध्य होंगे।"
पिछले साल भी नाकाम किया गया था प्रयास
प्रमुख समाजसेवी ध्रुव मिश्रा ने भी सरकार की इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी इस तरह की नीलामी करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनके सामूहिक प्रयास से शासन द्वारा उस नीलामी को निरस्त कर दिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी, "अब एक बार फिर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ देने के लिए यह कोशिश की जा रही है, जिसे हम हरगिज नहीं होने देंगे। अगर नीलामी की गई तो हजारों लोग सड़कों पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।"
इस विरोध प्रदर्शन में पिंटू निषाद, कृष्णा निषाद, सत्येंद्र निषाद, जीवन निषाद, रोहित निषाद, रमेश निषाद, मोनू निषाद, विकास निषाद सहित दर्जनों गांवों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन रोहित निषाद ने किया।