चंदौली में बाढ़ से निपटने के लिए बनीं 41 चौकियां, डीएम ने अधिकारियों को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

 

चंदौली में मानसून और संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्ट्रेट में हुई अहम बैठक में डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने अधिकारियों को 3 दिन में सभी बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।

 
 

जिले में 41 बाढ़ चौकियां स्थापित

लापरवाही पर सीधे दंडात्मक कार्रवाई होगी

नाविकों का डेटाबेस रहेगा तैयार

3 दिन में देना होगा प्रमाण-पत्र

जलभराव पर बिजली काटने के निर्देश

आगामी मानसून के मौसम और संभावित बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन चंदौली पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। जान-माल की सुरक्षा पक्की करने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी (डीएम) चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में एक बेहद महत्वपूर्ण अंतर्विभागीय समन्वय बैठक हुई। इस बैठक में जिले की नदियों, बंधियों और तटबंधों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। डीएम ने संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों में बाढ़ से पहले सभी जरूरी इंतजाम पूरे करने के सख्त निर्देश दिए हैं और साफ कहा कि लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।

डीएम का सख्त अल्टीमेटम: 3 दिन में सौंपें प्रमाण-पत्र
जिलाधिकारी ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs) को निर्देश दिया कि वे खुद अपने-अपने क्षेत्रों के बाढ़ शरणालयों (राहत शिविरों) में जाएं। वहां पीने के साफ पानी, लाइट और शौचालयों की सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का मौके पर मुआयना करें और 3 दिनों के भीतर इसका प्रमाण-पत्र जमा करें। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिया गया है कि वे अगले 3 दिनों में सभी सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) में सांप काटने की दवा यानी एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित कर उसका सर्टिफिकेट दें।

41 बाढ़ चौकियां तैयार, नाविकों की लिस्ट होगी अपडेट
बाढ़ पीड़ितों की तुरंत मदद के लिए पूरे जनपद में 41 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, जहां अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। डीएम ने सिंचाई और राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि इलाके में मौजूद सभी सरकारी और निजी नावों की कंडीशन जांच लें। सभी नाविकों के मोबाइल नंबर का एक डेटाबेस तैयार रखा जाए ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क किया जा सके। इसके अलावा कलेक्ट्रेट में बने बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Flood Control Room) को 24 घंटे सातों दिन चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पल-पल की रिपोर्ट मिलती रहे।

दवाओं का स्टॉक और पशुओं के चारे का इंतजाम
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस पैकेट और जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है, साथ ही मोबाइल मेडिकल टीमें भी बना दी गई हैं। वहीं, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को निर्देश मिला है कि वे बाढ़ के दौरान विस्थापित होने वाले मवेशियों के लिए चारे (भूसे) का एडवांस इंतजाम करें और पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण का काम समय से पूरा कर लें। लोक निर्माण विभाग (PWD) को राहत सामग्री पहुंचाने वाले रास्तों को तुरंत गड्ढामुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई है।

जलभराव होते ही कटेगी बिजली, बंधियों की होगी मरम्मत
बिजली विभाग को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ के दौरान अगर किसी सब-स्टेशन या ट्रांसफार्मर के पास पानी भरता है, तो हादसे से बचने के लिए तुरंत बिजली सप्लाई काटी जाए। इसकी जगह ग्राम प्रधानों के माध्यम से सोलर लाइट या मूवेबल लाइट की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। डीएम ने सिंचाई विभाग को भी बंधियों की पटरियों का स्थलीय निरीक्षण करने और जहां भी मरम्मत की जरूरत हो, वहां युद्धस्तर पर काम पूरा करने को कहा है। इसके अलावा जलभराव रोकने के लिए सभी प्रमुख नालों और ड्रेनों की सिल्ट (कीचड़) सफाई तत्काल पूरी करने की चेतावनी दी गई है।

लापरवाही की तो सीधे होगी जेल
डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि आपदा प्रबंधन में 'आपसी समन्वय' ही सबसे बड़ी चाबी है। राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली, पूर्ति और पशुपालन विभाग आपस में लगातार संपर्क में रहें। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यदि किसी भी विभाग की सुस्ती या लापरवाही से राहत कार्य प्रभावित हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सीधे 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' (Disaster Management Act) के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।