किसानों की गुहार पर जागा प्रशासन, 13 मई से शुरू होगी गड़ई और चन्द्रप्रभा नदी की सफाई

चंदौली कलेक्ट्रेट में हुई हाई-लेवल मीटिंग में बड़ा फैसला लिया गया है। किसानों की मांग पर 13 मई 2026 से गड़ई और चन्द्रप्रभा नदी की सफाई और जंगली पौधों की कटाई का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।

 
 

13 मई से सफाई कार्य शुरू

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई महत्वपूर्ण बैठक

जंगली पौधों की तत्काल होगी कटाई

सैकड़ों किसानों की मौजूदगी में फैसला

अपर जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश

चंदौली जिले में आगामी मानसून और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। गड़ई और चन्द्रप्रभा नदी की खोदाई और सफाई की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत किसानों की गुहार रंग लाई है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि आगामी 13 मई 2026 से नदियों की सफाई का कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दिया जाएगा।

कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और किसानों की अहम बैठक
आज कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), सहायक अभियंता (बंधी), एक्सियन चंद्रप्रभा और भारी संख्या में क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे। बैठक के दौरान किसानों ने नदियों में उगे जंगली पौधों और जमी गाद के कारण होने वाले जलभराव की समस्या को प्रमुखता से उठाया। अधिकारियों ने किसानों की चिंताओं को वाजिब मानते हुए निर्णय लिया कि 13 मई से नदी के बेड से जंगली पौधों की सफाई और कटाई का कार्य हर हाल में शुरू कर दिया जाएगा।

भीषण बाढ़ के डर से सहमे थे किसान
विगत वर्षों में आई विनाशकारी बाढ़ ने चंदौली के हजारों एकड़ धान की फसल को बर्बाद कर दिया था। इस बार भी बरसात का मौसम नजदीक आने के साथ ही गड़ई और चन्द्रप्रभा नदी के तटवर्ती गाँवों के किसानों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। किसानों का आरोप था कि खोदाई का टेंडर कार्य कागजों में तो पूर्ण है, लेकिन धरातल पर काम न होने से स्थिति भयावह हो सकती थी। आज की बैठक के बाद अब किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इन मांगों पर प्रशासन ने दी सहमति
किसानों ने पत्र के माध्यम से प्रशासन के सामने कई तकनीकी बिंदु रखे थे, जिन पर चर्चा की गई और काम शुरू कराने का फैसला किया है....

1-नहरों और ड्रेन की सफाई: कोटवा ड्रेन और सुरौली माइनर ड्रेन की खोदाई 'टेल' (अंतिम छोर) से शुरू करने पर जोर दिया गया है।

2-पुलिया निर्माण की खामी: मुगलसराय-चकिया मार्ग पर बनी ऊंची पुलिया के कारण रुकने वाले पानी की निकासी के लिए समाधान निकालने की मांग की गई।

3-अवैध निर्माण और गाद: बबुरी (दूबेपुर) से चोरभवा और पाण्ड्यपुर तक के नालों की तत्काल सफाई का निर्देश दिया गया है।

सैकड़ों गाँवों को मिलेगी बाढ़ से सुरक्षा
प्रशासन की इस पहल से विशेष रूप से भगवा नार (पड़या नेगुरा के पास) और ओझ नार के आसपास के इलाकों को फायदा होगा, जिनका पानी सीधे गंगा जी में मिलता है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि उनकी आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है, ऐसे में नदियों की सफाई समय पर होना अनिवार्य है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि 13 मई से शुरू होने वाला यह कार्य पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा ताकि मानसून के दौरान जलमग्न होने की स्थिति पैदा न हो।