नकली और प्रतिबंधित कीटनाशकों पर लगेगी रोक, 'ग्रो सेफ फूड 2.0' में कृषि वैज्ञानिकों ने दिए खास टिप्स
चंदौली के किसान कल्याण केंद्र में 'ग्रो सेफ फूड अभियान 2.0' कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नकली कीटनाशकों से बचने और सुरक्षित अन्न उत्पादन के लिए जैविक खेती अपनाने के तरीके सिखाए।
किसान कल्याण केंद्र में कार्यशाला
नकली कीटनाशकों से बचें किसान
जैविक रसायनों पर दें जोर
छिड़काव के समय बरतें सावधानी
कीटनाशी अधिनियम का हो पालन
चंदौली। जिले के किसानों को सुरक्षित और जहरमुक्त खेती के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी सिलसिले में मंगलवार 30 जून 2026 को किसान कल्याण केंद्र के सभागार में 'ग्रो सेफ फूड अभियान 2.0' के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अभियान का असली मकसद किसानों को नकली, प्रतिबंधित और नुकसानदेह कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचाना है।
कार्यक्रम की शुरुआत कीटनाशक विक्रेताओं, स्थानीय किसानों और कृषि विभाग के तकनीकी सहायकों के रजिस्ट्रेशन के साथ हुई। कार्यशाला में मौजूद सभी लोगों को मिट्टी और सेहत दोनों को बचाने का संकल्प दिलाया गया।
अंधाधुंध केमिकल से दूषित हो रही मिट्टी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि फसलों में कीटनाशकों के असुरक्षित और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से न केवल इंसानों की सेहत और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि हमारी उपजाऊ मिट्टी भी लगातार दूषित होती जा रही है। उन्होंने आम जनता, दुकानदारों और किसानों से अपील की कि वे केमिकल वाली दवाओं को छोड़कर जैविक रसायनों का अधिक से अधिक प्रयोग करें।
छिड़काव के समय सावधानियां हैं जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने सुरक्षित अन्न उत्पादन और 'एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन' (IPM) तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समझाया कि खेतों में दवाओं का छिड़काव करते समय कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।
इसी क्रम में ग्रीन लैंड कंपनी के प्रतिनिधि दिनेश कुमार ने धान की फसल को सुरक्षित रखने की तकनीक बताई, जबकि मुकेश गंगवार ने किसानों के सवालों के जवाब देकर उनकी शंकाओं को दूर किया।
कीटनाशक दुकानदारों को सख्त हिदायत
वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप ए) रमेश सिंह यादव ने किसानों को बताया कि असली-नकली कृषि उत्पादों की पहचान कैसे करें और कीटनाशकों के डिब्बे पर लिखे निर्देशों को पढ़ना क्यों जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने दुकानदारों को कड़े लहजे में चेतावनी दी।
उन्होंने साफ कहा कि सभी कीटनाशी विक्रेता 'कीटनाशी अधिनियम 1968' और 'नियम 1971' के कानूनों का कड़ाई से पालन करते हुए ही व्यापार करें, लापरवाही मिलने पर बख्शा नहीं जाएगा। इस मौके पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान मुन्ना सिंह, शैलेन्द्र पांडेय, तेज बहादुर यादव सहित भारी संख्या में किसान और कृषि व्यवसायी मौजूद रहे।