चंदौली में गुरु पूर्णिमा की धूम: कीनाराम मठ से लेकर अवधूत राम आश्रम तक, गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंचे भक्त

 

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर चंदौली के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग पवित्र गंगा में स्नान और पूजा-पाठ कर अपने गुरुओं का आशीर्वाद ले रहे हैं। जानिए कैसे इस खास दिन पर मंदिरों और आश्रमों में भक्तों का तांता लगा हुआ है।

 
 

चंदौली के गंगा घाटों पर उमड़े श्रद्धालु

बाबा कीनाराम मठ में लगी भक्तों की भीड़

गुरु पूर्णिमा पर गंगा स्नान का खास महत्व

सुरक्षा के लिए जल पुलिस और एनडीआरएफ तैनात

अज्ञान मिटाकर ज्ञान की ओर ले जाते हैं गुरु

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे देश की तरह चंदौली जिले में भी बड़े ही धूमधाम और सच्ची आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर जिले में बहने वाली पश्चिम वाहिनी गंगा नदी में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह सवेरे से ही बड़ी तादाद में लोग गंगा घाटों की तरफ रुख कर रहे हैं और पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। गंगा स्नान करने के बाद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना और मंत्रों का जाप कर रहे हैं। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों का दौर लगातार जारी है।

सुरक्षा के किए गए हैं कड़े इंतजाम
गंगा घाटों पर उमड़ने वाली इस भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। किसी भी तरह के हादसे को टालने के लिए घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को खास तौर पर तैनात किया गया है। सुरक्षाकर्मी लगातार नावों के जरिए गश्त कर रहे हैं और लोगों से गहरे पानी में न जाने की अपील कर रहे हैं। इससे श्रद्धालु बिना किसी डर के आराम से अपना स्नान और पूजा-पाठ पूरा कर पा रहे हैं।

मठों और आश्रमों में लगा भक्तों का तांता
गंगा स्नान करने के बाद लोग अपने-अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेने के लिए निकल पड़े हैं। चंदौली जिले के मशहूर बाबा कीनाराम मठ में दर्शन करने वालों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इसके अलावा 'नए सरकार की कुटिया' और 'भगवान अवधूत राम के आश्रम' सहित तमाम अन्य पवित्र जगहों पर भी भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। हर कोई आज के दिन अपने गुरु के सामने माथा टेककर उनके प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान जताना चाहता है।

ज्ञान और प्रकाश का है यह पावन पर्व
इस मौके पर तीर्थ पुरोहितों ने गुरु पूर्णिमा की अहमियत पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु वह होता है जो इंसान को अज्ञान के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के उजाले की तरफ ले जाता है। 
पुरोहितों का कहना है कि इसी पावन दिन पर पुराने समय में ऋषि-मुनियों ने समाज को ज्ञान का सही रास्ता दिखाया था। यही वजह है कि हिंदू धर्म में इस त्योहार को बहुत ही खास माना जाता है और गुरुओं की पूरे मन से पूजा की जाती है।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की हो रही कामना
कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो दूर-दराज के इलाकों से गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान करने के लिए यहां आते हैं और फिर दर्शन के लिए काशी (वाराणसी) भी जाते हैं। बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को गंगा स्नान कराने लाते हैं ताकि उन्हें भगवान का आशीर्वाद मिल सके। वे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो और उन्हें अच्छी शिक्षा व ज्ञान मिले। इसके बाद लोग बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और जीवन में तरक्की व सद्बुद्धि की मन्नत मांगते हैं।

स्नान से मिलती है शांति और सकारात्मक ऊर्जा
घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। एक भक्त ने बताया कि इस दिन का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान शिव पूरी सृष्टि का भार अपने कंधों पर संभालते हैं। भक्तों का कहना है कि आज के दिन गंगा नदी में नहाने से मन को असीम शांति मिलती है और शरीर में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दिन गुरुओं को सम्मान देने और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का है।

 एक अन्य श्रद्धालु ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वह हर साल इस मौके पर गंगा स्नान और गुरु वंदना के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु मंत्र लेने वाले हर व्यक्ति के लिए यह दिन बहुत बड़ा होता है, इसलिए वह अपने गुरु के पास पहुंचे हैं। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि इस बार घाटों पर स्नान करना बहुत अच्छा रहा। भीड़ थोड़ी कम होने की वजह से सभी को बहुत ही आराम से पूजा-पाठ करने और ध्यान लगाने का मौका मिल गया। गुरु के दर्शन से सभी भक्तों का मन पूरी तरह से गदगद है।