बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाएं, ऐसे लक्षण होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं
 

डॉ. ऋषि कुमार ने कहा कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर प्रकार की गर्मी की बीमारी है, जो तब होती है जब बच्चे का शरीर अपनी क्षमता से अधिक गर्मी पैदा करता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के मुख्य तापमान में तेजी से वृद्धि होती है,
 

डॉ. ऋषि कुमार ने हीट स्ट्रोक से बच्चों को बचाने के बताए उपाय

गर्मी की यह बीमारी हो सकती है जानलेवा

इसके लक्षण दिखते हो जाएं सावधान घरेलू उपचार के साथ लें अच्छे डॉक्टर की सलाह  

डॉ. ऋषि कुमार ने कहा कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर प्रकार की गर्मी की बीमारी है, जो तब होती है जब बच्चे का शरीर अपनी क्षमता से अधिक गर्मी पैदा करता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के मुख्य तापमान में तेजी से वृद्धि होती है, जिससे मस्तिष्क क्षति हो सकती है या यदि तुरंत इलाज न किया जाए तो जानलेवा साबित हो सकता है।


अनामिका चाइल्ड केयर हॉस्पिटल जीटी रोड, फुटिया पर सेवा देने वाले डॉ. ऋषि कुमार ने बताया कि अपने बच्चों को हीट  स्ट्रोक से बचाने के लिए  हमेशा ताज पानी पिलाते रहे हैं। अगर आवश्यक है तभी बच्चे को लेकर बाहर जाए अन्यथा इस भीषण गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक (लू) लगने कि काफी आशंका रहती है।

इसके लक्षण बच्चे में दिखे तो तत्काल एक्टिव होने की जरूरत है। अक्सर हल्की गर्मी की बीमारियों जैसे गर्मी की ऐंठन और गर्मी की थकावट के  संकेत बुखार व लगातार टट्टी होने जैसे लक्षणों में दिखते हैं। ऐसा अक्सर तब होता है जब बच्चा  गर्मी में बाहर खेल रहा होता है या धूप में अत्यधिक समय रहा करता है। इसीलिए गर्मी की थकावट का तुरंत इलाज करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हीट स्ट्रोक में विकसित हो सकता है।

डॉ. ऋषि कुमार ने कहा कि यदि आपके बच्चे में गर्मी से होने वाली थकावट के लक्षण दिखाई देते हैं, तो  आपको तुरंत नजदीकी डॉक्टर को दिखाना चाहिए या बच्चे को ठंडी, छायादार जगह रखकर पूरे शरीर को ढक कर रखना चाहिए। उसे हल्के व ढीले कपड़े पहनाकर ओआर‌एस का घोल पिलाते रहना चाहिए। इस दौरान उसे ऐसे ठंडे तरल पदार्थ पीने के लिए प्रोत्साहित करें, जिनमें नमक हो। बच्चे के शरीर पर ठंडा व गीला तौलिया या स्पंज लगाकर टेंपरेटर कम करने की कोशिश करें। इसके अलवा यदि आपका बच्चा अपने पैरों, बाहों या पेट में दर्दनाक मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत करता है, तो दर्द वाली मांसपेशियों को धीरे से खींचें या मालिश करें।