अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं है नहरों की साफ सफाई, झाड़-झंखाड़ से पटी मानिकपुर-सवैया नहर

फसलों की समय पर सिंचाई न होने से किसानों का आर्थिक नुकसान होगा। छोटे किसानों को तो खेती में नुकसान उठाना पड़ सकता है और खाद्यान्न संकट का खतरा भी मंडरा रहा है।
 

सफाई न होने से मानिकपुर-सवैया नहर की बदहाल स्थिति

कई लोग नहीं कर पाते हैं नहर से सिंचाई

हजारों हेक्टेयर फसल की सिंचाई संकट में

वर्षों की अनदेखी से किसानों में बढ़ रहा है आक्रोश

चंदौली जिले के सदर विकास क्षेत्र में स्थित मानिकपुर-सवैया शाखा नहर की दुर्दशा ने क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कर्मनाशा मुख्य नहर से जुड़ी यह शाखा कभी खेतों को जीवन देने वाली थी, लेकिन वर्षों से सफाई और मरम्मत न होने के कारण अब इसका जलप्रवाह पूरी तरह ठप हो गया है। नहर में जम गई गाद और झाड़-झंखाड़ ने इसे एक सूखी, बेहाल धारा में बदल दिया है। इसका सीधा असर किसानों की सिंचित फसलों पर पड़ रहा है।

किसानों का दर्द
ग्रामीण बताते हैं कि इस नहर से सिंचित होने वाली हजारों हेक्टेयर भूमि अब पानी की कमी से सूखने लगी है। खरीफ की फसलें मुरझाने लगी हैं और पानी की कमी के कारण छोटे और सीमांत किसान चिंतित हैं। जिनके पास निजी संसाधन हैं, वे ट्यूबवेल या डीजल पंप से किसी तरह खेतों में पानी पहुंचा रहे हैं। लेकिन अधिकांश छोटे किसानों के लिए यह महंगा और कठिन उपाय है।

सालों की अनदेखी का परिणाम
किसानों का आरोप है कि नहर की सफाई और मरम्मत कई वर्षों से नहीं हुई। झाड़-झंखाड़ और गाद ने पानी के प्रवाह को रोक दिया है। विभाग और प्रशासन से कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसान कहते हैं कि पहले नहर में पानी समय पर आता था, जिससे खेतों में बुवाई और कटाई आसानी से होती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था ठप हो गई है।

नहर के सूखने से कृषि संकट
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नहर की सफाई और जल प्रवाह बहाल नहीं किया गया, तो यह संकट बड़े पैमाने पर कृषि आपदा में बदल सकता है। फसलों की समय पर सिंचाई न होने से किसानों का आर्थिक नुकसान होगा। छोटे किसानों को तो खेती में नुकसान उठाना पड़ सकता है और खाद्यान्न संकट का खतरा भी मंडरा रहा है।

किसानों की अपील
क्षेत्र के किसान मुस्ताक अहमद, गुड्डू प्रधान और अन्य ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से नहर की तत्काल सफाई और जलप्रवाह बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि नहर में पानी की कमी से छोटे और सीमांत किसान भगवान भरोसे खेती करने को विवश हैं। यदि जल प्रवाह बहाल नहीं किया गया, तो आने वाली रबी फसलें भी खतरे में पड़ सकती हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग
किसानों ने नहर की मरम्मत और साफ-सफाई की तत्काल कार्यवाही की मांग की है। भोड़सर, परासी, नरसिंहपुर और मानिकपुर-सवैया जैसे गांवों के खेतों में सिंचाई के लिए नहर जल प्रवाह बहाल होना जरूरी है। उन्होंने चेताया है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

किसानों की परेशानी का दायरा
अस्लम, शमाराम और गंगा राम जैसे किसान बताते हैं कि नहर की बदहाल स्थिति के कारण फसलें समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही हैं। इससे खेतों की उपज प्रभावित हो रही है और किसानों की आमदनी में भारी कमी आ रही है।

वित्तीय और सामाजिक प्रभाव
नहर की हालत ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर डाला है, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक तनाव भी बढ़ा है। छोटे किसानों की चिंता यह है कि अगर नहर की मरम्मत नहीं हुई, तो उन्हें खेती के लिए महंगे विकल्प अपनाने पड़ेंगे।

प्रशासन की जिम्मेदारी
फेरू राम ने कहा कि प्रशासन को तुरंत नहर की मरम्मत और सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे न केवल किसानों की फसलें सुरक्षित होंगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।