ADM कार्यालय में हुयी बैठक में एक महीने का आश्वासन लेकर लौटे मनोज, गुस्सा, 9 मांगों पर व्यवस्थाएं सुधारने का दिया मौका
चंदौली के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में लाचार वृद्ध महिला का इलाज न होने पर बवाल मच गया। मनोज सिंह डब्लू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ADM को 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। प्रशासन को व्यवस्था सुधारने के लिए 1 महीने की मोहलत मिली है।
चंदौली मेडिकल कॉलेज में 9 मांगों का ज्ञापन
ADM दफ्तर में अधिकारियों संग हुई वार्ता
त्रिस्तरीय जांच कमेटी का किया गया गठन
1 महीने में सुधार न होने पर आंदोलन
निजी अस्पताल में हुआ महिला का इलाज
चंदौली जिले के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनहीनता का बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक गरीब व असहाय विधवा महिला पिछले 10 दिनों से अपने इलाज के लिए भटक रही थी। इस घटना से आक्रोशित होकर पूर्व प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह 'डब्लू' और स्थानीय नेताओं ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
लाचार महिला को निजी अस्पताल में मिला इलाज
पीड़ित बुजुर्ग महिला दिल की बीमारी, शुगर, बीपी और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी। मेडिकल कॉलेज में तमाम जांचें होने के बावजूद डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन नहीं किया और अंत में मरीज को रेफर कर दिया। इसके बाद मनोज सिंह डब्लू ने मरीज को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ दो यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद डॉक्टरों ने उनका सफल ऑपरेशन किया। इस घटना ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
धरने की चेतावनी के बाद हरकत में आया प्रशासन
लापरवाही और अव्यवस्था के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोमवार, 10 अगस्त को मेडिकल कॉलेज परिसर में शांतिपूर्ण धरने का ऐलान किया था। आंदोलन की आहट मिलते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और एक त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित की। इस कमेटी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और अपर जिलाधिकारी (ADM) को शामिल किया गया है।
ADM कार्यालय में बैठक, 1 महीने का अल्टीमेटम
सोमवार को आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें राम जनम यादव, हरदेव मौर्या, संतोष उपाध्याय और मनोज कुमार सिंह डब्लू शामिल थे, ADM कार्यालय पहुंचा। नेताओं ने अधिकारियों को 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और व्यवस्था दुरुस्त करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद नेताओं ने प्रशासन को सुधार के लिए एक महीने का समय दिया है।
लेटर में दर्ज 9 प्रमुख जनहित मांगें:
1- विधवा मां प्रकरण की निष्पक्ष जांच: ऑपरेशन के नाम पर ₹30,000, ₹13,000 और ₹10,000 मांगे जाने के आरोपों की समयबद्ध व निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
2- अनधिकृत वसूली पर रोक: इलाज या किसी सुविधा के नाम पर अवैध वसूली बंद हो और अस्पताल के सभी वैध शुल्क सार्वजनिक प्रदर्शित किए जाएं।
3- अंदर ही मिले दवाएं: मरीजों को सभी दवाएं अस्पताल के भीतर से ही दी जाएं और बाहर की दवाएं लिखकर गरीबों पर आर्थिक बोझ न डाला जाए।
4- जांच सुविधाएं परिसर में हों: उपलब्ध सभी जांचें मेडिकल कॉलेज के अंदर कराई जाएं, मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर न भेजा जाए।
5- रजिस्ट्रेशन काउंटर बढ़ें: नई बिल्डिंग में पर्याप्त पर्ची/रजिस्ट्रेशन काउंटर बनें तथा डिजिटल/QR व्यवस्था लागू हो, ताकि बार-बार चक्कर न काटना पड़े।
6- वृद्धों व दिव्यांगों के लिए व्यवस्था: बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर मरीजों के लिए अलग सहायता काउंटर और प्रभावी Help Desk बनाया जाए।
7- दलालों की भूमिका समाप्त हो: परिसर में दलालों व अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश बंद हो और कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट रहे।
8- स्थायी Help & Complaint Desk: मरीजों की शिकायतें सुनने के लिए लिखित रसीद देने वाला प्रभावी शिकायत काउंटर बनाया जाए।
9- जरूरी जानकारी सार्वजनिक हो: डॉक्टरों की ड्यूटी, जांचों की उपलब्धता और दवाओं के स्टॉक की जानकारी स्पष्ट रूप से बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए।