सहकार से समृद्धि संकल्प को साकार करने हेतु MPACS पदाधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण 

कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा "सहकार से समृद्धि" के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। यह महत्वपूर्ण सत्र इंदिरा गांधी सहकारी प्रबंध संस्थान (IGCMI), लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर


DPR-BDP नवाचार और बैंकिंग सहायता पर चर्चा


इंदिरा गांधी सहकारी प्रबंध संस्थान लखनऊ द्वारा प्रशिक्षण 


बैंकिंग और सरकारी योजनाओं पर मार्गदर्शन

चंदौली जिले में "सहकार से समृद्धि" के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार, चंदौली में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण सत्र इंदिरा गांधी सहकारी प्रबंध संस्थान (IGCMI), लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें नवगठित MPACS (मल्टीपर्पज प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटीज) समितियों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

चंदौली कलेक्ट्रेट सभागार में MPACS पदाधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम

डीपीआर, नवाचार और सहकारिता की भावना पर चर्चा
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य फोकस सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाना था। सत्र संयोजक अभिषेक तिवारी ने प्रतिभागियों को सहकारिता की मूल भावना और इसके महत्व से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और बीडीपी (बिजनेस डेवलपमेंट प्लान) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये योजनाएँ समितियों के भविष्य के विकास और वित्तीय स्थायित्व के लिए अनिवार्य हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार आधारित व्यवसाय मॉडल अपनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई ताकि समितियाँ पारंपरिक कार्यों के अलावा नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर सकें।

बैंकिंग और सरकारी योजनाओं पर मार्गदर्शन
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने MPACS पदाधिकारियों को व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। मार्गदर्शन हेतु एआरसीएस (सहायक निबंधक सहकारी समितियाँ) श्रीप्रकाश उपाध्याय, अपर जिला सहकारी अधिकारी श्री धर्मेंद्र कुमार सिंह तथा वाराणसी जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, शाखा चंदौली से श्री विकास राज उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने समितियों को मिलने वाली बैंकिंग सहायता, ऋण प्रक्रियाएँ (विशेषकर कृषि एवं गैर-कृषि ऋण), सरकारी योजनाओं के लाभ (जैसे- किसान क्रेडिट कार्ड, आदि) और दस्तावेजीकरण की आवश्यकताओं पर आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने पारदर्शिता और सुशासन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

सामूहिक संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा "सहकार से समृद्धि" के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा देने और MPACS समितियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।