इस्लाम में नफरत और आतंक की कोई जगह नहीं: चंदौली मुहर्रम मजलिस में गूंजा अमन-चैन का पैगाम

 

चंदौली में आयोजित मुहर्रम की मजलिस में मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम दिया। मजलिस में जनाबे सकीना के मसायब सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं और देश में शांति की दुआ मांगी गई।

 
 

मजलिस में गूंजा अमन का पैगाम

जनाबे सकीना के मसायब सुन नम आंखें

अंजुमन के नन्हें अज़ादारों का मातम

देश और दुनिया में शांति की दुआ

 चंदौली जिले में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर आयोजित एक मजलिस में इस्लाम के शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। इस मौके पर जाने-माने धर्मगुरु मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने अज़ादारों को संबोधित किया। उन्होंने साफ लफ्ज़ों में कहा कि इस्लाम में हिंसा, नफरत और आतंक के लिए रत्ती भर भी जगह नहीं है। पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ने हमेशा यही सिखाया कि मुसलमानों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे उनके पड़ोसियों तक को कभी कोई तकलीफ न पहुंचे।

दुनिया को आज सबसे ज्यादा मोहब्बत की जरूरत
मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने कहा कि आज पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत आपसी प्रेम, सहिष्णुता और एक-दूसरे के सम्मान की है। इस्लाम की असली बुनियाद ही इंसानियत, करुणा और मानव सेवा पर टिकी है। जो लोग भी आतंक या हिंसा का रास्ता चुनते हैं, उनका इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। मुहर्रम का महीना सिर्फ शोक मनाने का नहीं, बल्कि धैर्य, त्याग, न्याय और हर तरह के अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। कर्बला की सीख पूरी इंसानियत के लिए एक बड़ा मार्गदर्शक है।

जनाबे सकीना के दुख सुन रो पड़े अज़ादार
मजलिस के दौरान जब मौलाना ने इमाम हुसैन (अ.) की लाडली सुपुत्री जनाबे सकीना के मसायब (कठिनाइयों और दुखों) का दर्दभरा जिक्र किया, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें छलक आईं। कर्बला के मैदान से लेकर शाम के बाजार तक मासूम बच्ची द्वारा झेली गई तकलीफों को सुनकर पूरा माहौल गम और गहरी अकीदत में डूब गया। इस दौरान सिकंदरपुर की अंजुमन अब्बासिया के नन्हें अज़ादारों ने बेहद गमगीन माहौल में नौहाख्वानी की और सीनाज़नी (मातम) कर इमाम हुसैन की बारगाह में अपना पुरसा पेश किया। इसके साथ ही ऐंलहीं की अंजुमन गुलज़ारे पंजतनी और डिग्गी की अंजुमन ने भी मसायबी नौहे पढ़े।

देश में अमन-चैन के लिए मांगी गई विशेष दुआ
मजलिस की शुरुआत में मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शाहिद बनारसी और ताबिश ने अपनी बेहद असरदार पेशख्वानी के जरिए शोहदाए कर्बला को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मजलिस में बहुत बड़ी संख्या में क्षेत्र के अज़ादार और आम लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के समापन पर मौलाना और सभी अज़ादारों ने मिलकर अपने देश, प्रदेश और पूरी दुनिया में अमन, अटूट शांति, तरक्की और आपसी भाईचारे की मजबूती के लिए विशेष रूप से हाथ उठाकर दुआ मांगी।