मोदी सरकार के 12 साल: चंदौली में प्रभारी मंत्री संजीव गोंड ने किसानों को दिया 'शून्य बजट' खेती का महामंत्र
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर चंदौली में दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला शुरू हुई। प्रभारी मंत्री संजीव गोंड और वैज्ञानिकों ने 500 से अधिक किसानों को रासायनिक खाद छोड़ जैविक घोल बनाने के तरीके सिखाए।
केंद्र सरकार के 12 साल बेमिसाल
दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला शुरू
लागत घटाने के वैज्ञानिकों ने दिए मंत्र
जीवामृत और ब्रह्मास्त्र बनाने की ट्रेनिंग
500 किसानों ने लिया आत्मनिर्भरता का संकल्प
केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के शानदार 12 साल पूरे होने की खुशी में चंदौली जिला एक बड़े उत्सव का गवाह बना। गुरुवार, 18 जून 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र के प्रांगण में दो दिवसीय 'प्राकृतिक कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान' का बेहद धूमधाम से आगाज किया गया।
अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इस केंद्र पर सरकार की नीतियों की साफ झलक दिखी। इस भव्य कार्यक्रम का मुख्य मकसद किसानों की आमदनी को दोगुना करना और उन्हें पारंपरिक खेती से निकालकर आधुनिक तकनीकों से जोड़ना रहा।
प्रभारी मंत्री ने बताया खेती का असली भविष्य
इस खास कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और जिले के प्रभारी मंत्री संजीव कुमार गोंड ने की। उन्होंने दीप जलाकर दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की और किसानों का उत्साह बढ़ाया। अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री संजीव गोंड ने कहा कि प्राकृतिक खेती ही हमारे देश और कृषि का असली भविष्य है। रासायनिक खादों पर अपनी निर्भरता को कम करके हम न सिर्फ खेती की लागत घटा सकते हैं, बल्कि देश की सेहत भी सुधार सकते हैं।
दिग्गज नेता और अधिकारी रहे मौजूद
प्रभारी मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के 12 वर्षों का सुशासन पूरी तरह से देश के गरीब और अन्नदाताओं को समर्पित रहा है। कार्यक्रम में करीब 400 से 500 किसानों की भारी मौजूदगी यह साफ बताती है कि जनता का सरकार की नीतियों पर कितना मजबूत भरोसा है। इस मौके पर मुगलसराय विधायक रमेश जायसवाल, चकिया विधायक कैलाश आचार्य और सैयदराजा विधायक प्रतिनिधि सुशील सिंह मौजूद रहे। साथ ही भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह, डीएम चंद्र मोहन गर्ग और सीडीओ आर जगत साई ने भी शिरकत की। उपनिदेशक कृषि भीमसेन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
वैज्ञानिकों ने सिखाए 'सुपर एलनीनो' से बचने के मंत्र
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने सरकार के कृषि सुधार विजन को किसानों के सामने रखा। उन्होंने मौसम में आ रहे बदलावों को लेकर सचेत किया। डॉ. रघुवंशी ने कहा कि आज के समय में 'सुपर एलनीनो' जैसी खतरनाक और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इनसे निपटने के लिए किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।
घर पर जैविक घोल बनाने की लाइव ट्रेनिंग
किसानों की जेब का खर्च बचाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने केंद्र पर कई तरह के जैविक घोल बनाने की लाइव ट्रेनिंग दी। किसानों को बताया गया कि वे कैसे बहुत कम खर्च में खुद खाद तैयार कर सकते हैं। कार्यशाला में बीज शोधन के लिए बीजामृत, जमीन के लिए जीवामृत और घनजीवामृत बनाने की विधि सिखाई गई। इसके अलावा फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए देसी नुस्खों जैसे ब्रह्मास्त्र, अग्नास्त्र और नीमास्त्र बनाने की बारीकियां भी समझाई गईं।
शून्य लागत से बचेगी जमीन की ताकत
कृषि वैज्ञानिकों ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि इन प्राकृतिक और घरेलू उपायों को अपनाकर देश का किसान अपनी खेती की लागत को शून्य के करीब ला सकता है। इससे बाजार से महंगी खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देसी तरीकों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारी धरती मां की उपजाऊ शक्ति हमेशा के लिए सुरक्षित और मजबूत बनी रहती है। रसायनों के इस्तेमाल से जो जमीन बंजर हो रही है, उसे प्राकृतिक खेती के जरिए दोबारा नया जीवन दिया जा सकता है।
पहले दिन किसानों ने लिया बड़ा संकल्प
सरकार के इस जन-जागरूकता अभियान का पहला दिन पूरी तरह से कामयाब और उम्मीदों से भरा रहा। कार्यशाला में आए सैकड़ों किसानों ने एक सुर में रासायनिक खेती को छोड़ने का मन बनाया।
सभी किसानों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे अब प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे, अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे और देश के आत्मनिर्भर भारत के सपने को मिलकर साकार करेंगे। कार्यक्रम के आखिरी में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आर जगत साई ने प्रभारी मंत्री और सभी मेहमानों का आभार जताते हुए पहले दिन के समापन का ऐलान किया।